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22...जैन मुनि के व्रतारोपण की त्रैकालिक उपयोगिता
रहा है। मध्यकाल में क्षुल्लक का स्थान भट्टारकों ने ले लिया था, किन्तु विगत एक शताब्दी से यह व्यवस्था पुनः प्रचलन में है। सन्दर्भ-सूची 1. अमरकोश, 2/20/16 पृ. 215. 2. आचारदिनकर, पृ. 72. 3. जैनेन्द्र सिद्धान्त कोश, भा. 2, पृ. 188-190. 4. आचारदिनकर, पृ. 72. 5. वही, पृ. 72. 6. वही, पृ. 72-73. 7. हुम्बुजश्रमणभक्तिसंग्रह, भा. 1, पृ. 497-498.