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________________ १०९ बची छे. आ बाबत ज्यारे आपणे प्रयत्न करीशुं त्यारपछी आपणने भान थशे के अरेरे! शुं आटली बधी दोलतमांथी आटली ज रही ? खेर, हवे बन्युं ते खरं; पण हवे आमांथी घटवी न जोईए, नहि तो पछी आपणे निर्धन थई जईशुं. 92 बीजी मुंबई कॉन्फरन्से आ बाबतनो पुनः ठराव करी तेना सक्रिय अमल माटे रु. १९, १६६नुं फंड भेगुं कर्यु हतुं. १. जैन ग्रंथावली - कॉन्फरन्सनुं पहेलुं प्रकाशन आपणा सर्व भंडारोमां जेसलमेरनो भंडार सुप्रसिद्ध छे. खुद कलिकालसर्वज्ञ हेमचंद्राचार्य पोते आ भंडार जोवा पधार्या हता. तेथी कॉन्फरन्से सौथी प्रथम आ भंडारनां पुस्तकोनी टीप करवानुं नक्की कर्यु. आ भंडार सौ भंडारोमां श्रेष्ठ गणाय छे. तेने माटे एम कहेवाय छे के ज्यारे मुसलमानोनुं प्राबल्य थयुं अने तेओ हिंदुओनी मूर्तिओ तथा पुस्तकभंडारो वगेरेनो नाश करवा लाग्या त्यारे ते खतना दूरंदेशी जैन भाईओए जेसलमेरना महारावळ श्री रजपूत होवाथी तेओ आ समये आपण आश्रय आपी आपणा धर्मना स्थंभरुप अमूल्य पुस्तकोने साचवी आपणा उपर उपकार करशे एम जाणीने तेमनी सहानुभूति मेळवी पाटणना भंडारोमांना जथ्थाबंध पुस्तको मध्यरात्रिना समये ऊंटो उपर चढावी जेसलमेर मोकलांव्यां हतां. आ अगणित पुस्तको महारावळ श्रीना आश्रयाधीन भयरहित स्थळमां (जेसलमेरना किल्लामां ) सुरक्षित रीते राखवामां आव्यां तां अने हाल पण छे. जेसलमेर 'भंडारना वहीवटकर्ताओ कोईने भंडार खोली बतावता न हता. भंडार खोली आपवा माटे कॉन्फरन्से लगभग Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.005582
Book TitleJain Shwetambar Conferenceno Itihas
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNagkumar Makatai
PublisherSohanlal Madansinh Kothari
Publication Year1960
Total Pages216
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size14 MB
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