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________________ (६) ने गुणेकरी, खेच्यो जे जसनो वितान ॥ च ॥ ते हने तुं त्रिजुवनधणी, मत करजे नुकसान ॥चासुन ॥ १२ ॥ एम प्रजाना मुखथकी, जिहां तिहां सुणी वात ॥ च ॥ मनमें अतिविकसित थयो, जेम जल धरेंछुमपात ॥ चणासु०॥ १३ ॥ धन धन ए माहरी प्रजा, मुऊ ऊपर धरे राग ॥ च० ॥ सहुए वांडे जलु, माहरूं पूरण नाग ॥ च० ॥ सु॥ १४ ॥ मोह नविजयें हेजशु, नाषी बीजी ढाल ॥ च ॥ कहीस सरस हवे हुँ कथा, सांजलो बाल गोपाल ॥ च० ॥ सु० ॥ १५ ॥ ॥ दोहा ॥ ॥ आगल नरपति संचस्यो, दीगे कौतुक एक॥ कन्या पांच मली नली, वधते रूप विवेक ॥१॥ समरूपे सरिखे गुणे, सरखी वय सोहंत ॥ गोरी गु णनी उरमी, सुरनरमन मोहंत ॥२॥ पहेरी पी तांबर प्रवर, सोल सजी सिणगार ॥ नोली टोलीयें मली, रमवाने तेणीवार ॥३॥ कुब्जरूप महीपति करी, निरखे कन्याकेलि ॥ क्रिमा आरंने हवे, पंचे गजगति गेल ॥४॥ Jain Educationa International For Personal and Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.005386
Book TitleMantung Raja ane Manvati Ranino Ras
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Bhimsinh Manek
PublisherShravak Bhimsinh Manek
Publication Year1906
Total Pages132
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size16 MB
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