________________ इसकी सावधानी रखनी चाहिए। कोई अपने स्वार्थीय कारणों से संघ में विखवाद खड़ा करे तो उसको सप्रेम समझाने के लिए प्रयत्न करना चाहिये / मन्दिर के पूजारी आदि से तथा साफ-सफाई आदि के लिए रखे हुए उपाश्रयादि के नौकर से अपला निजी कोई भी कार्य नही करवाना चाहिये / अपना काम करवाना होवे तो उसको अपनी ओर से पैसे देकर ही करवाना उचित है। अन्यथा देवद्रव्यादि के भक्षण का दोष लगेगा / और निजी कार्य पूजारी आदि के दारा इस ढंग से तो नही ही करवाना चाहिये कि जिससे मन्दिर के कार्यों में, प्रभुभक्तिमें व्याोप पडे, व्याघात होवे। जिनमन्दिरादि के वहीवट करने वाले ट्रस्टीग] के दिमाग में यह बात निश्चित रूप से होनी चाहिए कि ट्रस्टी पद सत्ता भोगने का पद नही है / लेकिन जिनमन्दिररादि संस्था के सेवक बनकर कार्य करतो का पद है। आज कई जगह ट्रस्टी पद को मान-सम्मान सत्ता और प्रतिष्ठा का पद बना दिया है। ये लोग जिनमन्दिरादि की सार-संभाल तथा देवद्रव्यादि की 12