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________________ भगवई स. 9 उ. 33 665 भगवं महावीरे देवाणदं माणि सयमेयं पव्वावेइ सय० 2 ता सयमेव अज्ज. चंदणाए अज्जाए सीसिणित्ताए दलयइ। तए णं सा अज्जचंदणा अज्जा देवा. जवं माहणि सयमेव मुंडावेइ सयमेव सेहावेइ एवं जहेव उसमदत्तो तहेव अज्ज. चंदणाए अज्जाए इमं एयारूवं धम्मियं उवएसं सम्मं संपडिवज्जइ तमाणाए तह गच्छइ जाव संजमेणं संजमेइ / तए गं सा देवाणंदा अज्जा अज्जचंदणाए अज्जाए अंतियं सामाइयमाइयाई एक्कारस अंगाई अहिज्जइ सेसं तं चेव जाव सव्वदुक्खप्पहीणा // 381 // तस्स णं माहणकुंडग्गामस्स जयरस्स पच्चत्थिमेणं एत्य गं खत्तियकुंडग्गामे णामं णयरे होत्था वण्णओ, तत्थ णं खत्तियकुंडग्गामे . गयरे जमाली णामं खत्तियकुमारे परिवसइ अड्ढे दित्ते जाव अपरिभूए उप्पि पासायवरगए फट्टमाहिं मुइंगमत्थएहि बत्तीसइबद्धेहि णाडएहिं णाणाविहवरतरुणीसंपउत्तेहि उवणच्चिज्जमाणे-उवणच्चिज्जमाणे उवगिज्जमाणे 2 उवलालिज्जमाणे 2 पाउसवासारत्तसरयहेमंतवसंतगिम्हपज्जते छप्पिउऊ जहा विभवेणं माणमाणे 2 कालं गालेमाणे इठे सद्दफरिसरसरूवगंधे पंचविहे माणुस्सए कामभोगे पच्चणुन्मवमाणे विहरइ / तए णं खत्तियकुंडग्गामे गयरे सिंघाडगतियचउक्कचच्चर जाव बहुजणसद्देइ वा जहा उववाइए जाव एवं पण्ण. वेइ एवं परूवेइ-एवं खलु देवाणप्पिया ! समणे भगवं महावीरे आइगरे जाव सवण्णू सव्वदरिसी माहुणकुंडग्गामस्स णयरस्स बहिया बहुसालए चेइए अहापडिरूवं जाव विहरइ, तं महप्फलं खल देवाणुप्पिया ! तहारूवाणे अरहंताणं भगवंताणं जहा उववाइए जाव एगाभिमुहे खत्तियकुंडग्गामं णयरं मज्झमझेणं णिग्गच्छइ णिग्गच्छित्ता मेणेव माहणकुंडग्गामे गयरे जेणेव बहुसालए चेइए एवं जहा उववाइए जाव तिविहाए पज्जवासणाए पज्जुवासइ / तए णं तस्स जमालिस्स खत्तियकुमारस्स तं महया जणसई वा जाव जणसणिवायं वा सुणमाणस्स वा पासमाणस्स वा अयमेयारूवे अज्झथिए जाव समुप्पज्जित्थाकिंण्णं अज्ज खत्तियकुंडग्गामे णयरे इंदमहेइ वा खंदमहेइ वा मुगुंदमहेइ वा णागमहेइ वा जक्खमहेइ वा भूयमहेइ वा कूवमहेइ वा तडागमहेइ वा गई. महेइ वा दहमहेइ वा पव्वयमहेइ वा रुक्खमहेइ वा चेइयमहेइ वा थूभमहेइ वा जणं एए बहवें उग्गा भोगा राइण्णा इक्खागा णाया कोरव्वा खत्तिया खत्तियपुत्ता भडा भडपुत्ता जहा उववाइए जाव सत्थवाहप्पमिइओ
SR No.004390
Book TitleAngpavittha Suttani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRatanlal Doshi, Parasmal Chandaliya
PublisherAkhil Bharatiya Sadhumargi Jain Sanskruti Rakshak Sangh
Publication Year1982
Total Pages1476
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, agam_acharang, agam_sutrakritang, agam_sthanang, agam_samvayang, agam_bhagwati, agam_gyatadharmkatha, agam_upasakdasha, agam_antkrutdasha, & agam_anutta
File Size23 MB
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