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________________ ववहारो उ. 4 866 कप्पए, से.संतरा छेए वा परिहारे वा // 113 // आयरियडवज्झाए असरमाणे परं चउरायपंचरायाओ कप्पागं भिवखं णो उवट्ठावेइ कप्पाए, अत्थि या इत्थ से केइ माणणिज्जे कप्पाए, णस्थि से केइ छेए वा परिहारे वा, णत्थि या इत्थ से केइ माणणिज्जे कप्पाए, से संतरा हेए वा परिहारे वा // 114 // आयरियट्वज्झाए सरमाणे वा असरमाणे वा परं दसरायकप्पाओ व.प्पागं भिक्खू णो उवट्ठावेइ कप्पाए, अस्थि या इत्थ से केइ माणणिज्जे कप्पाए, णत्थि से केइ छेए वा परिहारे वा, णत्थि या इत्थ से केइ माणणिज्जे क.प्पाए संवच्छरं तस्स तप्पत्तियं णो कप्पइ आयरियत्तं वा उवज्झायरा वा पक्त्तयत्तं वा थेरत्तं वा गणित्तं वा गणहरत्तं वा गणावच्छेइयत्तं वा उद्दिसित्तए // 115 // भिक्खू य गणाओ अवकम्म अण्णं गणं उवसंपज्जित्ताणं विहरेजा, तं च केइ साहन्मिए पासित्ता वएजा-कं अज्जो ! उवसंपज्जित्ताणं विहरसि ? जे तत्थ सव्वराइणिए तं बए जा, अह भंते ! करस कप्पाए ? जे तत्थ सव्वबहुस्सुए तं वएजा, जं वा से भगवं वक्खइ तस्स आणाउववायवयणणिद्देसे .चिट्ठिस्सामि || 116 // बहवे साहम्मिया इच्छेज्जा एगयओ अभिणिचारियं चारए, णो ण्हं कप्पइ थेरे अणापुच्छित्ता एण्यओ अभिणिचारियं चारए, कप्पइ ण्हं थेरे आपुच्छित्ता एर.यओ अभिणिचारियं चारए, थेरा य से वियरेजा ए(वं)वण्हं कप्पइ एगयओ अभिणिचारियं चारए, थेरा य से णो वियरेजा एव ण्हं णो कप्पइ एगयओ अभिणिचारियं चारए, जं तत्थ थेरेहिं अविइण्णे अभिणिचारियं चरंति, से संतरा छेए वा परिहारे वा // 117|| चरियापविढे भिक्खू जाव चउरायपंचरायाओ थरे पासेजा,सच्चेव आलोयणा सच्चेव पडिकमणा सच्चेव ओग्गहस्स पुव्वाणुण्णवणा चिट्ठइ अहालंदमवि ओग्गहे // 118 // चरियापविढे भिक्खू परं चउरायपंचरायाओ थेरे पासेजा, पुणो आलोए जा पुणो पडिकमज्जा पुणो छेयपरिहारस्स उवट्ठाएजा, भिक्खुभावस्स अट्ठाए दोच्चं पि ओग्गहे अणुण्णवेयव्वे सिया,अणुजाणह भंते ! मिओग्गहं अहालंदं धुवं णितियं णिच्छइयं वेउट्टियं, तओ पच्छा कायसंफासं // 119 // चरियाणियट्टे भिव खू जाव चउरायपंचरायाओ थेरे पासेजा,सच्चेव आलोयणा सच्चेव पडिक्कमणा सच्चेव ओग्गहस्स पुव्वाणुण्णवणा चिट्ठइ अहालंदमवि ओग्गहे // 120 // चरियाणियट्टे भिवखू परं चउरायपंचरायाओ थरे पासेजा, पुणो आलोएजा, पुणो पडिक मेजा, पुणो छेयपरिहारस्स उवट्टाएजा, भिक्खुभावस्स अट्ठाए दोच्चं पि ओग्गहे अणुयणवेयव्वे सिया / अणुजाणह भंते !
SR No.004389
Book TitleAnangpavittha Suttani Bio Suyakhandho
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRatanlal Doshi, Parasmal Chandaliya
PublisherAkhil Bharatiya Sadhumargi Jain Sanskruti Rakshak Sangh
Publication Year1984
Total Pages746
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, agam_jambudwipapragnapti, agam_jambudwipapragnapti, agam_nirayavalika, agam_kalpavatansika, agam_pushpika, agam_pushpachulika, agam_vrushnidasha, & agam
File Size13 MB
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