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________________ द्वयार्थक क्रिया-रूप 1. बल = प्राण धारण करना अथवा खाना। 2. कल = आवाज करना अथवा जानना। 3. रिग = प्रवेश करना अथवा जाना। 4. वम्फ = इच्छा करना अथवा खाना। 5. थक्क = नीचे जाना अथवा विलम्ब करना। 6. झंख = विलाप करना, उलाहना देना अथवा कहना। 7. पडिवाल = प्रतीक्षा करना अथवा रक्षा करना।. 8. चय = सकना-समर्थ होना तथा छोड़ना 9. तर = सकना-समर्थ होना तथा तैरना 10. तीर = सकना-समर्थ होना तथा समाप्त करना अथवा परिपूर्ण करना 11. पार = सकना-समर्थ होना तथा पार पहुँचना, पूर्ण करना-कार्य समाप्त करना उपसर्ग-युक्त भिन्नार्थक क्रिया-रूप 1. पहर = युद्ध करना 2. संहर = संवरण करना 3. अणुहर = समान होना 4. विहर = खेलना 5. आहर = भोजन करना 6. पडिहर = परिपूर्ण करना 7. परिहर = छोड़ना 8. उवहर = आदर-सम्मान करना अथवा पूजना 9. वाहर = बुलाना अथवा पुकारना 10. पवस = परदेस जाना 11. उच्चुप्प = आरूढ़ होना अथवा चढ़ना 12. उल्लुह = निकलना प्राकृत-हिन्दी-व्याकरण (भाग-2) (84) Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.004205
Book TitlePrakrit Hindi Vyakaran Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKamalchand Sogani, Shakuntala Jain
PublisherApbhramsa Sahitya Academy
Publication Year2013
Total Pages150
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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