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________________ नपुंसकलिंग-सव्व (सब) एकवचन बहुवचन प्रथमा सव्वं (सबने) सव्वाइं, सव्वाइँ, सव्वाणि (सब, सबने) द्वितीया सव्वं ' (सबको) सव्वाइं, सव्वाइँ, सव्वाणि (सबको) तृतीया सव्वेण, सव्वेणं (सबसे, सबके द्वारा) सव्वेहि, सव्वेहिं, सव्वेहिँ (सबसे, सबके द्वारा) चतुर्थी सव्वाय, सव्वस्स (सबके लिए) सव्वाण, सव्वाणं, सव्वेसिं (सबके लिए) पंचमी सव्वत्तो, सव्वाओ, सव्वाउ सव्वाहि, सव्वाहिन्तो, सव्वा सव्वादो, सव्वादु सव्वातो, सव्वातु (सबसे) सव्वत्तो, सव्वाओ, सव्वाउ, सव्वाहि, सव्वाहिन्तो, सव्वासुन्तो, सव्वेहि, सव्वेहिन्तो, सव्वेसुन्तो सव्वादो, सव्वादु (सबसे). षष्ठी सव्वस्स सव्वश्श, सव्वाह (सबका, सबकी, सबके) सव्वेसिं, सव्वाण, सव्वाणं सव्वाह (सबका, सबकी, सबके) सप्तमी सव्वेसु, सव्वेसुं (सबमें, सब पर) सव्वस्सिं, सव्वम्मि, सव्वत्थ सव्वहिं सव्वम्हि, सव्वंसि, सव्वंमि (सबमें, सब पर) (134) प्राकृत-हिन्दी-व्याकरण (भाग-1) Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.004204
Book TitlePrakrit Hindi Vyakaran Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKamalchand Sogani, Shakuntala Jain
PublisherApbhramsa Sahitya Academy
Publication Year2012
Total Pages198
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size11 MB
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