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________________ Jain Education International उत्कृष्ट स्थिति अबाधाकाल निषेककाल २० कोड़ाकोड़ी सागरोपम, २००० वर्ष उत्कृष्ट स्थिति में दो हजार वर्ष कम " " " " षट्संहननवत् षट्संहनन के समान १० कोड़ाकोड़ी सागरोपम १००० वर्ष उत्कृष्ट स्थिति में १ हजार वर्ष कम १२॥ कोड़ाकोड़ी सागरोपम १२५० वर्ष उत्कृष्ट स्थिति में १२५० १५ कोड़ाकोड़ी सागरोपम १५०० वर्ष For Personal & Private Use Only कम कर्मप्रकृति का नाम जघन्य स्थिति ५९. सेवार्तसंहनन. . ... पल्योपम के असंख्यातवें ..... भाग कम सागरोपम का २ भाग ६०-६५. छ प्रकार के संस्थाननामकर्म छह संहनननामकर्म के समान । ६६. शुक्लवर्णनामकर्म पल्योपम के असंख्यातवें भाग कम सागरोपम का २ भाग ६७. पीतवर्णनामकर्म पल्योपम के असंख्यातवें भाग कम सागरोपम का भाग ६८. रलवर्णनामकर्म पल्योपम के असंख्यातवें भाग कम सागरोपम का भाग ६९. नीलवर्णनामकर्म पल्योपम के असंख्यातवें भाग कम सागरोपम का , भाग ७०. कृष्णवर्णनामकर्म पल्योपम के असंख्यातवें भाग कम सागरोपम का २ भाग ७५. . सुरभिगन्धनामकर्म . पल्योपम के असंख्यातवें भाग कम सागरोपम का 1 भाग ७२. दुरभिगन्धनामकर्म पल्योपम के असंख्यातवें भाग कम सागरोपम का २ भाग ७३-७७. मधुर आदि पांच रस नामकर्म शुक्लवर्ण आदि पांच वर्णी की स्थिति के समान १७॥ कोड़ाकोड़ी सागरोपम १७५० वर्ष २० कोड़ाकोड़ी सागरोपम २००० वर्ष वर्ष कम उत्कृष्ट स्थिति में १५०० वर्ष कम उत्कृष्ट स्थिति में १७५० वर्ष कम उत्कृष्ट स्थिति में २ हजार वर्ष कम उत्कृष्ट स्थिति में १ हजार वर्ष कम उत्कृष्ट स्थिति में २ हजार वर्ष कम पंचवर्णवत् १० कोड़ाकोड़ी सागरोपम १००० वर्ष २० कोड़ाकोड़ी सागरोम २००० वर्ष शुक्लादि पंचवर्णवत् पंचवर्णवत्. www.jainelibrary.org
SR No.004096
Book TitlePragnapana Sutra Part 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichand Banthiya, Parasmal Chandaliya
PublisherAkhil Bharatiya Sudharm Jain Sanskruti Rakshak Sangh
Publication Year2008
Total Pages358
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_pragyapana
File Size8 MB
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