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________________ २१५ जैनागम सिद्ध मूर्तिपूजा फरी कुमारने कह्यु : सामे दिवाल उपर टींगाता महाराजा साहेबना फोटाने नीचे उतारी एना उपर बूटनो प्रहार करो. कुमारे का : अररर ! एवं ते करातुं हशे. प्रभाशंकर भाईए पूछ्युं : शा माटे न कराय? ए महाराजा पोते तो छ नहि. केनवासना कपडा उपर चीतरेखें सामान्य चित्र ज छे. कुमारे का : हा, ए चित्र खरं. पण ते चित्र कोर्नु छ ? मारा पिताजीनुं छे. मारा पिताजीना चित्रने बूट मारवी ए मारा पिताजीने ज बुट मारवा बराबर छे. आथी हुं एने बूट न मारी शकुं. हवे प्रभाशंकरभाईए मूळ वात उपर आवतां कह्युः आQ ज मूर्तिपूजानुं छे. मूर्तिनी पूजा ए खरेखर तो मूळ व्यक्तिनी ज पूजा छे. एटले भगवाननी मूर्तिनी पूजा ए भगवाननी ज पूजा छे. मूर्तिपूजा कोईए नवी उपजावेली नथी. अनादिकाळथी छे. ज्यारे भगवान साक्षात् विद्यमान होय छे त्यारे पण मूर्तिपूजा होय छे. कारण के भगवान साक्षात् होय त्यारे पण कोई एक ज क्षेत्रमा होय. एटले ते सिवायना क्षेत्रमा भक्तो भगवाननी मूर्ति बनावीने तेनी पूजा करता हता. मूर्तिपूजानो विरोध करनार पण एकया बीजी रीते मूर्तिपूजा करे छे. ... (१) मुसलमानो मस्जिदमां पीरनी आकृतिने पुष्प-धूप वगेरेथी पूजे छे. ताजिया बनावी एनी सामे नृत्य वगेरे करे छे. मक्का-मदीना जईने त्यां रहेल एक गोळ काळा पथ्थरने चुंबन करीने पोतानां पापोनो नाश थयो एम माने छे. (२) इसाइओ (क्रिश्चियनो) पण देवळमां ईशुनी शूळी उपर लटकती मूर्ति (क्रोस) राखे छे. ते मूर्तिने पूज्यभावथी जुए छे. तेनी समक्ष प्रार्थना करे छे. शिर उपरथी टोपी उतारी नमस्कार करे छे. पुष्पहार चढावे छे. (३) कबीर, नानक, रामचरण आदि संतोना अनुयायीओए पोतपोताना पूज्योनी समाधि बनावी छे. ए समाधिनी पुष्पादिथी श्रद्धांजलि आपवा द्वारा पूजा करे छे. लोको दूर दूरथी ए समाधिनां दर्शन करवा आवे छे. (४) पारसीओ पोताना इष्ट अग्निदेवनी पूजा करे छे, तेनी सामे वाजा Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.004077
Book TitleJainagam Siddh Murtipuja
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBhushan Shah
PublisherChandroday Parivar
Publication Year2014
Total Pages352
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Devdravya
File Size10 MB
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