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________________ चेतन्यकर्मचरित्र ॥दोहा॥ हविधिचैतनजीतिकें ॥ आटोव्रतपुरमांहि ॥ आझाश्रीजिनदेव . की ॥ ताकुंविराधेनांहि ॥ ५ ॥ ज्युंज्युंथांनककाजके ॥ कोनेसबवि घिआय ॥ अब नावेवैराग्यता ॥ सूनहूंनवीकमनलाय ॥ २ ॥ ॥ढालमननमरानी॥ पंचमहाव्रतमनधरो ॥ सुनोप्राणारे॥गंमीग्रहस्थावास ॥ आजसुनो पानीरे। काल अनंतोसंसारमें।।सुपथैनम्योमोहनोदास। ० ॥१॥ ते मिथ्यातदसाविषे ॥ सु० ॥ कोनेपापअनंग ॥ ७॥ नवअनंतमेंजेकि ए ॥सु० ॥ रागवेषपरसंग ॥आ० ॥ २ ॥ग्याननेकुंतोकोंनहीं।। सु० ॥ तबकिनेबहुपाप आ० ॥ तेउःखतोकुंदेहें। सु० ॥ तेंचूकोअबआ प॥आ० ॥३॥ तेंअव्रतमेजोकीए । सु० ॥ व्रतविनाब हूपाटा ॥०॥ देसविरत्तमेंपांच में ॥ सु० ॥ थावरहिंसाताया था ॥ ४ ॥ कियेंकर्म तेंअतिघने ॥ सु० ॥ क्यूंनुगतेंविनुजाय ॥ आ० ॥ मोहमहांतहित ते किटों ॥ सु० ॥ तेतोकुंछःखदेय ॥ आ॥ ॥ ५॥जेहिजीवमोहनिवारी यो ।सु० ॥ तिहिपायोअनंद !षा० ॥ मनवचकायाजोगसों ॥सु०॥ तेकीएबहूविंद ॥ आ० ॥ ६ ॥ तेनुगतेविनुक्यूंमिटें || सु० ॥ जेबांधे ते आप ॥ आo || जोतुंसंयमादरें।सु० ॥ करेतपस्याजाप ॥आ॥ ॥ ७ ॥ तोसबक खपाटके ॥ सु० ॥ पांचेपरमसमाहिं ॥ ० ॥ पू र्वबांधेकर्मते || सु ० ॥ सबजिनमेंख पिजाहिं ॥आ. ॥ ७ ॥ एहविधि भावनानावतें ॥ सु० ॥ आटोअतीवैराग । आ० ॥ जीवचाहेंसंज मगहों ॥ सु० ॥ अबेंकोनविधिजाग ॥आ० ॥ ५ ॥ ॥दोहा॥ जायचाहेंसंयमगहों ॥ मोहलेननहोदेय ॥ बेटोआगेरोककें ॥ प रमतपूरमेंजेट ॥।॥ सुनटसौप्रत्याखांनकों ॥ करीकेआगेवान ॥ Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003991
Book TitleDevchandraji krut Chovishi Balavbodh
Original Sutra AuthorN/A
Author
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages226
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size19 MB
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