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________________ प्राचीनगूर्जरकाव्यसङ्ग्रहः । तिहां छई नगरी अयोध्या । किसी ते नगरी । धनकनकसमृद्ध, पृथ्वीपीठि प्रसिड; अत्यंत रमणीय, सकललोकस्पृहणीय; पृथ्वीरूपिणीकामिनीरहइं तिलकायमान, सर्वसौंदर्यनिधान; लक्ष्मीलीलानिवास, सरस्वतीतणउ आवास; अतुलदेवकुलि मंडित, परचक्रि अखंडित, सदा सुठाकुरि पालित, रमणीयराजमार्गि शोभित, उत्तंगप्राकारवेष्टित; सदा आश्चर्यतणउ निलय, वसुधावनितावलय, निरुपमनागरिकतणउं ठाम, मनोभिराम; जनितदुर्जनक्षोभ, सज्जनोत्पादितशोभ; पुरुषरत्नोत्पत्तिरोहिणाचल, कुलवधूकल्पलतारत्नाचल। जीणइ नगरी देवगृह मेरुशिषरोपमान, धवलगृह स्वर्गविमानसमान; अनेक गवाक्ष वेदिका चउकी चित्रसाली जाली विकलसां तोरण धवलगृह भूमिगृह भांडागार कोष्ठागार सत्रागार गढ मढ मंदिर पडवां पटसाल अधहटां फडहटां दंडकलस आमलसार आंचली वंदवाल पंचवर्ण पताका दीपई । सर्वोसर मंत्रोसर मांजणहरां सप्तद्वारांतर प्रतोली रायंगण घोडाहडि अषाडउ गुणणी रंगमंडप सभामंडपसमूहि करी मनोहर एवंविध आवास । जेह नगरिमाहि दोसी नेस्ती साह वसाह पटउलीया पडसूत्रिया षजूरीआ बीजउरीआ कणसारा भणसारा मपारा नवकर भोजकर भला लामा अनेक लोक वसइ । पांचसई व्यवसाईया व्यवसायविषइ उल्लसइ । जेह नगर पाषलीया अनेकि कूया वावि सरोवर नई नीक निरुपम उद्यान आंब नींब जांबू जंबीर बीजपूरप्रमुख वृक्षावली करी प्रधान च्यारि पोलि, प्रधान कोसीसातणी ओलि; प्रभातसमइ सूर्यतणे किरणेकरी प्रासादतणे शिषिरि धजकलश झलकइ, धजऊड ललकइ । घणउं किसूं कहीइ, जिसी होइ अमरावती भोगावती अथवा अलका लंका इसी नगरी अयोध्या वषाणीइ । तीणि नगरी इक्ष्वाकुवंशावतंस विहितवयरीकुलविध्वंस निजकुलकमलराजहंस अतुलबल पराक्रम त्रिविक्रमसमान राजाश्रीसोमदेव राज्य प्रतिपालइ, प्रजा संसालइ, अन्याय टालइ । जे राजा सत्यवाचा राजा श्रीहरिचंद प्रतिज्ञा राजाश्रीयुधिष्ठिर निर्भय भीम आपन्न जीमूतवाहन विद्या बृहस्पति लावण्य लवणार्णव रूपि कंदर्प प्रताप मार्तड औदार्यि बलि राजा अद्भुतदानि चिंतामणि सेवकजनकल्पवृक्ष चतुरंगवाहिनीसमुद्र। घणउ किशिउ कहीइ महासासनु अरडकमल्ल जगझंपणउ प्रतापलंकेश्वर परराष्ट्रीरायहृदयशल्य इसिउ प्रतापीउ राजा राज्य प्रतिपालइ । तेह राजातणउ अंतःपुरिमाहि प्रधान गुणनिधान भरितणी भक्तिविषय महासावधानि स्त्री कमललोचना इसिइं नामि पदराज्ञी वर्तइ । जेह राणी, सहिजि Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003980
Book TitlePrachin Gurjar Kavyasangraha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorC D Dalal
PublisherCentral Library
Publication Year1920
Total Pages172
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size15 MB
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