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________________ द्रव्यपरीक्षा संपइ पवट्टमाणा मुद्दा अल्लावदीण रायस्स । दुविह दुगाणी दव्वो पउणा दस अट्ठ टंक सए ॥ १३४ ॥ छग्गाणी पुण दुविहा सड्डा पणवीस पउण पणवीसा । टंक सय मज्झि रुप्पउ सड्डा चउ दु जव नव विसुवा ॥ १३५ ॥ इग्गाणी सय मज्झे तंबउ पण नवइ टंक पण दव्वो । रायहरे विवहारे गणिज्ज इग्गाणिया सयलं ॥ १३६ ॥ इग पण दह पन्नासं सय तोला तुहि हेम टंकाई । चउ मासा दीनारो रुप्पय टंको य तोलीणो ॥ १३७ ॥ चउ मास जाव घडियं सहावदीणस्स तुच्छ मुद्दाई | दम्म छगाणी टंका रुप्प सुवन्नस्स तोलीणा ॥ १३८ ॥ ॥ इति अश्वपति महानरेन्द्र पातिसाहि अलावदी मुद्राः ॥ २५ • रूप्य टंका १ अलाई प्रति गण्यते ॥ १० छगानी सत मध्ये १० छगानी सतमध्ये ३० सत मध्ये ३० सत मध्ये ६० इगानी सत मध्ये ० शेष तांबा सत १ टंक पूरणे सर्व मुद्र दुगानी दुगानी तो ८ तो ८ तो ३ तो २ तो १ Jain Educationa International मा ६ मा ३ मा ३ मा ८ मा ८ ज ४॥ ज २२४ ज० इत्तो भणामि संपइ कुदुबुद्दी रायवंदिछोडस्स । चउरंस वट्ट मुद्दा नाणाविह तुल्ल मुल्लो य ॥ १३९ ॥ For Personal and Private Use Only ज० ज० ३५ बत्तीसं कणयमया रुप्पमया वीस दम्म सत्तविहा । चउविह तंबय साहा मुद्दा सव्वेवि तेसट्ठी ॥ १४० ॥ दारं ॥ इग पण दह तोलाई दस हिय जा सउ दिवड सउ दुसयं । इय वट्ट हेम टंका चउरंस पुणोवि एमेव ॥ १४१ ॥ www.jainelibrary.org
SR No.003822
Book TitleRatnaparikshadi Sapta Granth Sangraha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAgarchand Nahta, Bhanvarlal Nahta
PublisherRajasthan Prachyavidya Pratishthan Jodhpur
Publication Year1996
Total Pages206
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
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