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________________ रह-पवरवाहण-भड-चडगर-पहकरसंकुलाए सेणाए पहियकित्ती जेणेव बाहिरिया उवट्ठाणसाला जेणेव आभिसेक्के हत्थिरयणे तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता अंजणगिरिकडगसण्णिभं गयवइं नरवई दुरुढे तए णं से भरहा-हिवे नरिंदे हारोत्थयसुकयरइयवच्छे कुंडलउज्जोइयाणणे मउडदित्तसिरए नरसीहे नरवई नरिंदे नरवसभे मरुयरायवसभकप्पे अब्भहियरायतेयलच्छिए दिप्पमाणे पसत्थमंगलसएहिं संथुव्वमाणे जयसद्दकयालोए हत्थिखंधवरगए संकोरंटमल्लदामेणं छत्तेणं धरिज्जमाणेणं सेयवरचामराहिं उद्धव्वमाणीहिंउद्धुव्वमाणहीहिं जक्खसहस्ससंपरिवुडे वेसमणे चेव धणवई अमरवइसण्णिभाए इड्ढीए पहियकित्ती गंगाए महानए दाहिणिल्लेणं कूलेणं गामागर-नगर-खेड-कब्बड-मंडब-दोणमुह-पट्टणासम-संबाह-सहस्समंडियं थिमिय-मेइणीयं वसुहं अभिजिणमाणे-अभिजिणमाणे अग्गइं वराई रयणाई पडिच्छमाणे-पडिच्छमाणे तं दिव्वं चक्करयणं अनुगच्छमाणे-अनुगच्छमाणे जोयणंतरियाहिं वसहीहिं वसमाणे-वसमाणे जेणेव मागहतित्थे तेणेव उवागच्छड उवागच्छित्ता मागहतित्थस्स अदूरसामंते दुवालसजोयणायाम नवजोयणविच्छिण्णं वरणगरसरिच्छं विजयखंधावारनिवेसं करेइ करेत्ता वड्ढइरयणं सद्दावेई सद्दावेत्ता एवं वयासी-खिप्पामेव भो देवाणुप्पिया मम आवासं पोसहसालं च करेहि करेत्ता ममेयमाणत्तियं प्चचप्पिणाहि तए ण से वड्ढइरयणे भरहेणं रण्णा एवं वुत्ते समाणे हद्वतुट्ठ-जाव अंजलिं कट्ट एवं सामी तहत्ति आणाए विणएणं वयणं पडिसुणेइ पडिसुणेत्ता भरहस्स रण्णो आवसहं पोसहसालं च करेइ करेत्ता एयमाणत्तियं खिप्पामेव पच्चप्पिणति तए णं से भरहे राया आभिसेक्काओ हत्थिरयणाओ पच्चोरुहइ पच्चोरुहित्ता जेणेव पोसहवक्खारो-३ साला तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता पोसहसालं अनुपविसइ अनुपविसित्ता पोसहसालं पमज्जइ पमज्जित्ता दब्भसंथारगं संथरइ संथरित्ता दब्भसंथारगं दुरहइ दुरिहित्ता मागहतित्थकुमारस्स देवस्स अट्ठमभत्तं पगिण्हइ पगिण्हित्ता पोसहसालाए पोसहिए बंभयारी उम्मुक्कमणिसुव्णे ववगयमालावण्णगविलेवणे निक्खित्तसत्थमसले दब्भसंथरोवगए एगे अभीए अट्ठमभत्तं पडिजागरणमाणेपडिजा-गरमाणे विहरइ तए णं से भरहे राया अट्ठमभत्तंसि परिणमाणंसि पोसहसालाओ पडिणिक्खमइ पडिणिक्खमित्ता जेणेव बाहिरिया उवट्ठाणसाला तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता कोडुबिय-पुरिसे सद्दावेइ सद्दावेत्ता एवं वयासी-खिप्पामेव भो देवाणुप्पिया हय-गय-रह-पवरजोह-कलियं चाउरं-गिणिं सेण्णं सण्णाहेइ चाउग्धंटं अस्सरहं पडिकप्पेहत्ति कटु मज्जणघरं अनुपविसइ अनुपविसित्ता समुत्तजालाकुलाभिरामे तहेव जाव धवल-महामेहणिग्गए जाव मज्जणघराओ पडिणिक्खमइ पडिणिक्खमित्ता हय-गय-रह-पवरवाहणसेणाए पहियकित्ति जेणेव बाहिरिया उवट्ठाणसाला जेणेव चाउग्धंटे अस्सरहे तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता चाउग्धंटं अस्सरहं दुरुढे | [६२] तए णं से भरहे राया चाउग्धंट अस्सरहं दुरुढे समाणे हय-गय-रह-पवरजोह-कलियाए सद्धिं संपरिवुडे महयाभड-चडग-पहगरवंदपरिक्खित्ते चक्करयणदेसियमग्गे अनेगरायवरसहस्साणुजायमग्गे महया उक्किट्ठि-सीहनाय-बोल-कलकलरवेणं पक्खुभिय-महास-मुद्दरवभूयं पिव करेमाणे-पुरत्थिमदिसा-भिमुहे मागहतित्थेणं लवणसमुद्दे ओगाहइ जाव से रहवरस्स कुप्परा उल्ला तए णं से भरहे राया तुरगे निगिण्हई निगिण्हित्ता रहं ठवेड़ ठवेत्ता धणं परामसड़ तए णं तं अइरुग्गयबालचंद-इंदधण-सन्निकासं वरमहिसदरिय-दप्पिय-दढ-घणसिंगग्गरइयसारं उरग-वर-पवरगवल-पवरपरह्य-भमरकुल-नीलि-निद्ध-धंत-धोय-पढें निउणोविय-मिसिमिसेंत-मणिरयण-घंटियाजालपरिक्खित्तं तडितरुणकिरण-तवणिज्ज-ब्दधचिंधं [दीपरत्नसागर संशोधितः] [26] [१८-जंबूद्दीवपन्नत्ति]
SR No.003735
Book TitleAgam 18 Jambudivpannatti Sattam Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2013
Total Pages122
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 18, & agam_jambudwipapragnapti
File Size2 MB
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