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________________ जोयणसहस्सं सम्मच्छिमाणं जोयणपुहत्तं भुयपरिसप्पाणं ओहियगब्भवक्कंतियाण य उक्कोसेणं गाउयपुहत्तं सम्मुच्छिमाणं धणुपुहत्तं खहयराणं ओहियगब्भवक्कंतियाणं सम्मुच्छिमाण य तिण्ह वि उक्कोसेण धणुपुहत्तं । [५१३] जोयणसहस्स छठगाउयाइं तत्तो य जोयणसहस्सं । गाउयपुहत्तं भुयए धणुहपुहत्तं च पक्खीसु । [५१४] जोयणसहस्स गाउयपुहत्त तत्तो य जोयणपुहत्तं । दोण्हं तु धणुपुहत्तं सम्मुच्छिमे होति उच्चत्तं । [५१५] मणुस्सोरालियसरीरस्स णं भंते केमहालिया सरीरोगाहणा० जहण्णेणं अंगुलस्सअसंखेज्जइभागं उक्कोसेणं तिण्णिगाउयाई अपज्जत्ताणं जहण्णेणं वि उक्कोसेण वि अंगुलस्सअसंखेज्जइभागं सम्मुच्छिमाणं जहण्णेणं वि उक्कोसेण वि अंगुलस्सअसंखेज्जइभागं गब्भवक्तंतियाणं पज्जत्तयाण य जहण्णेणं अगुलस्सअसंखेज्जइभागं उक्कोसेणं तिण्णि गाउयाई । [५१६] वेउव्वियसरीरे णं भंते कतिविहे पन्नत्ते गोयमा दुविहे पन्नत्ते तं जहा-एगिदियवेउव्वियसरीरे य पंचेंदियवेउव्वियसरीरे य, जदि एगिदियवेउव्वियसरीरे किं वाउक्काइयएगिदियवेउव्वियसरीरे अवाउक्काइयएगिदियवेउव्वियसरीरे गोयमा वाउक्काइएगिदियवेउव्वियसरीरे नो अवाउक्काइयएगिदियवेठब्वियसरीरे, जदि वाउक्काइएगिदियवेउव्वियसरीरे किं० पुच्छा गोयमा नो सुहमवाउक्काइयएगिंदियवेउव्वियसरीरे बादरवाउक्काइयएगिंदियवेउव्वियसरीरे, जदि, बादरवाउक्काइएगिदियवेउव्वियसरीरे किं० पुच्छा गोयमा पज्जत्तबादरवाउक्काइयएगिदियवेउव्वियसरीरे नो अपज्जत्तबादरवाउक्काइयएगिदियवेठब्वियसरीरे, जदिं पंचेंदियवेउव्वियसरीरे किं० पुच्छा गोयमा नेरइयपंचेंदियवेउव्वियसरीरे वि जाव देवपंचेंदियवेउव्वियसरीरे वि, जदि नेरइयपंचेंदियवेउव्वियसरीरे किं० पुच्छा गोयमा रयणप्पभापुढविनेइयपंचेंदियवेउव्वियसरीरे वि जाव अहेसत्तमापुढविनेरइयपंचेंदियवेठब्वियसरीरे वि, जदि रयणप्पभापुढविनेरइयपंचेंदियवेठब्वियसरीरे किं० पुच्छा गोयमा पज्जत्तगरयणप्पभापुढविनेरयपंचेंदियवेउव्वियसरीरे वि अपज्जत्तगरयणप्पभापुढविनेरइयपंचेंदियवेउव्वियसरीरे वि एवं जाव अहेसत्तमाए दुगतो भेदो नेयव्वो, जदि तिरिक्खजोणियपंचेंदियवेउव्वियसरीरे किं० पुच्छा गोयमा नो सम्मच्छिमतिरिक्खजोणियपंचेंदियवेउव्वियसरीरे गब्भवक्कंतियतिरिक्खजोणियपंचेंदियवेउव्वियसरीरे, जदि गब्भवक्कंतियतिरिक्खजोणियपंचेंदियवेउव्वियसरीरे किं० पुच्छा गोयमा संखेज्जवासाउयगब्भवक्कंतियतिरिक्खजोणियपंचेंदियवेउव्वियसरीरे नो असंखेज्जवासाउयगब्भवक्कंतियतिरिक्खजोणियपंचेंदियवेउव्वियसरीरे, जदि संखेज्जवासाउयगब्भवक्कंतियतिरिक्खजोणियपंचेंदियवेउव्वियसरीरे किं० पुच्छा गोयमा पज्जत्तगसंखेज्जवासाउयगबअभवक्कंतियतिरिक्खजोणियपंचेंदिययवेउव्वियसरीरे नो अपज्जत्तगसंखेज्जवासाउयगब्भवक्कंतियतिरिक्खजोणियपंचेंदियवेउव्वियसरीरे, जदि संखेज्जवासाउयगब्भवक्कंतियतिरिक्खजोणियपंचेंदियवेउव्वियसरीरे किं० पुच्छा गोयमा जलयरसंखेज्जवासाउयगब्भवक्कंतियतिरिक्खजोणि य पंचेंदियवेउव्वियसरीरे वि थलयरसंखेज्जवासा उयगब्भवक्कंतियतिरिक्खजोणियपंचेंदियवेउव्वियसरीरे वि खहयरसंखेज्जवासाउयगब्भवक्कंतियतिरिक्खजोणियपंचेंदियवेउव्वियसरीरे वि, जदि जलयरसंखेज्जवासाउयगब्भवक्कंतियतिरिक्खजोणियपंचेंदियवेउव्वियसरीरे किं० पच्छा गोयमा पज्जत्तगजलयरसंखेज्जवासाउयगब्भवक्कंतियतिरिक्खजोणियपंचेंदियवेउव्वियसरीरे नो अपज्जत्तगजलयरसंखेज्जवासाउयगब्भवक्कंतियतिरिक्खजोणियपंचेंदियपय-२१ दीपरत्नसागर संशोधितः] [152] [१५-पन्नवणा]
SR No.003729
Book TitleAgam 15 Pannavana Chauttham Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2013
Total Pages202
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 15, & agam_pragyapana
File Size3 MB
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