SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 138
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ दव्वट्ठयाए तहेव पएसट्ठयाए वि भाणियव्वं नवरं-पएसट्ठयाए त्ति अभिलावविसेसो दव्वट्ठपएसट्ठयाएसव्वत्थोवा जहण्णगा काउलेस्सट्ठाणा दव्वट्ठयाए जहण्णगा नीललेसट्ठाणा दव्वट्ठयाए असंखेज्जगुणा, एवं कण्हलेसट्ठाणा तेउलेसट्ठाणा पम्हलेसट्ठाणा जहण्णया सुक्कलेसट्ठाणा दव्वट्ठयाए असंखेज्जगुणा, जहण्णएहितो सुक्कलेसहाणेहिंतो दव्वट्ठयाए उक्कोसा काउलेसट्ठाणा दव्वट्ठयाए असंखेज्जगुणा, उक्कोसा नीललेसट्ठाणा दव्वट्ठयाए असंखेज्जगुणा एवं कण्हलेसटाणा तेउलेसट्ठाणा पम्हलेसट्ठाणा उक्कोसगा सुक्कलेसट्ठाणा दव्वट्ठयाए असंखेज्जगुणा, उक्कोसएहिंतो सुक्कलेसट्ठाणेहिंतो दव्वट्ठयाए जहण्णगा काउलेसट्ठाणा पदेसट्ठयाए अनंतगुणा, जहण्णगा नीललेसट्ठाणा पएसट्ठयाए असंखेज्जगुणा, एवं कण्हलेसट्ठाणा तेउलेसट्ठाणा पम्हलेसट्ठाणा जहण्णगा सुक्कलेसट्ठाणा असंखेज्जगुणा, जहण्णएहितो सुक्कलेसट्ठाणेहितो पदेसट्ठयाए उक्कोसा काउलेसट्ठाणा पदेसट्टयाए असंखेज्जगुणा, उक्कोसया नीललेसटाणा पदेसट्टयाए असंखेज्जगुणा एवं कण्हलेसट्ठाणा तेउलेसट्ठाणा पम्हलेसट्ठाणा उक्कोसया सुक्कलेसट्टाणा पएसद्वयाए असंखेज्जगुणा । ० सत्तरसमे पये चउत्थो उद्देसओ समत्तो . । पंचमो-उद्देसओ । [४६९] कति णं भंते लेस्साओ पन्नत्ताओ गोयमा छल्लेसाओ पन्नत्ताओ तं जहाकण्लेस्सा पय-१७ जाव सुक्कलेस्सा, से नूणं भंते कण्हलेस्सा नीललेस्सं पप्प तारूवत्ताए तावण्णत्ताए तागंधत्ताए तारसत्ताए ताफासत्ताए भुज्जो-भुज्जो परिणमंति इतो आढत्तं जहा- चउत्थुद्देसए तहा भाणियव्वं जाव वेरुलियमणिदिवतो त्ति, से नणं भंते कण्हलेस्सा नीललेस्सं पप्प नो तारूवत्ताए जाव नो ताफासत्ताए भज्जो-भज्जो परिणमति हंता गोयमा कण्हलेस्सा नीललेस्सं पप्प नो तारूवत्ताए जाव नो ताफासत्ताए भुज्जो-भुज्जो परिणमति, से केणटेणं भंते एवं वुच्चति० गोयमा आगारभावमाताए वा से सिया पलिभागभावमाताए वा से सिया कण्हलेस्सा णं सा नो खलु सा नीललेस्सा तत्थ गता उस्सक्कति से तेणटेणं गोयमा एवं वुच्चति-कण्हलेस्सा नीललेस्सं पप्प नो तारूवत्ताए जाव भुज्जो-भुज्जो परिणमति, से नूणं भंते नीललेस्सा काउलेस्सं पप्प नो तारूवत्ताए जाव भुज्जो-भुज्जो परिणमति हंता गोयमा० नीललेस्सा जाव परिणमति से केणट्टेणं भंते एवं वुच्चइ० गोयमा आगारभावमाताए वा से सिया पलिभागभावमाताए वा सिया नीललेस्सा णं सा नो खलु सा काउलेस्सा तत्थ गता उस्कक्कति वा ओसक्कति वा से तेणटेणं गोयमा एवं वुच्चइ-नीललेस्सा काउलेस्सं पप्प नो तारूवत्ताए जाव भुज्जोभुज्जो परिणमति एवं काउलेस्सा तेउलेस्सं पप्प तेउलेस्सा पम्हलेस्सं पप्प पम्हलेस्स सुक्कंलस्सं पप्प, से नूणं भंते सुक्कलेस्सा पम्हलेस्सं पप्प नो तारूवत्ताए जाव भुज्जो-भुज्जो परिणिमति हंता गोयमा सुक्कलेस्सा जाव परिणमंति से केणटेणं भंते एवं वुच्चति० गोयमा आगारभावमाताए वा जाव सुक्कलेस्सा णं सा नो खल सा पम्हलेस्सा तत्थ गता ओसक्कति से तेणटेणं गोयमा एवं वुच्चइ जाव नो परिणमति . सत्तरसमे पये पंचमो उद्दसेओ समत्तो . दीपरत्नसागर संशोधितः] [137] [१५-पन्नवणा]
SR No.003729
Book TitleAgam 15 Pannavana Chauttham Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2013
Total Pages202
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 15, & agam_pragyapana
File Size3 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy