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________________ गोयमा चत्तारि दव्विंदिया पन्नत्ता तं जहा- दो धाणा जीहा फासे चरिंदियाणं पुच्छा गोयमा छ दव्विंदिया पन्नत्ता तं जहा- दो नेत्ता दो धाणा जीहा फासे सेसाणं जहा- नेरइयाणं जाव वेमाणियाणं एगमेगस्स णं भंते नेरइयस्स केवतिया दव्विंदिया अतीता गोयमा, अनंता केवतिया बद्धेल्लगा गोयमा अट्ठ केवतिया पुरेक्खडा गोयमा अट्ठ वा सोलस्स वा सत्तरस वा संखेज्जा वा असंखेज्जा वा अनंता वा, एगमेगस्स णं भंते असुरकुमारस्स केवतिया दव्विंदिया अतीता, गोयमा अनंता केवतिया वद्धेल्लगा गोयमा अट्ट, पय-१५ केवतिया पुरेक्खडा गोयमा अट्ठ वा नव वा संखेज्ज वा असंखेज्ज वा अनंता वा एवं जाव थणियकुमाराणं ताव भाणियव्वं, एवं पुढविक्काइय-आउक्काइय-वणस्सइकाइयस्स वि नवरं-केवतिया बदल्लग त्ति पुच्छए उत्तरं एक्कं फासिंदियं पन्नत्तं एवं तेउक्काइय-वाउक्काइयस्स वि नवरं-पुरेक्खडा नव वा दस वा, एवं बेइंदियाण वि नवरं-बद्धेलगपच्छाए दोण्णि एवं तेइंदियस्स वि नवरं-बद्धेल्लगा चत्तारि एवं चउरिंदियस्स वि नवरं बद्धेल्लगा छ पंचेंदियतिरिक्खजोणिय-मणूस-वाणमंतर-जोइसिय-सोहम्मीसाणग-देवस्स जहाअसुरकुमारस्स नवरं-मणूसस्स पुरेक्खडा कस्सइ अत्थि कस्सइ नत्थि जस्सत्थि अट्ठ वा नव वा संखेज्जा वा असंखेज्जा वा अनंता वा, सणंकुमारा-माहिंद-जाव-आणय-पाणय-आरण-अच्चुय-गेवेज्जगदेवस्स य जहानेरइयस्स, एगमेगस्स णं भंते विजय-वेजयंत-जयंत-अपराजियदेवस्स केवतिया दव्विंदिया अतीता गोयमा अनंता, केवतिया बद्धलगा गोयमा अट्ठा, केवतिया परेक्खडा गोयमा अट्ट वा सोलस वा चउवीसा वा संखेज्जा वा सव्वट्ठसिद्धगदेवस्स अतीता अनंता बद्धेल्लगा अट्ठ रेक्खडा अट्ठ, नेरइयाणं भंते केवतिया दव्विंदिया अतीता गोयमा अनंता, बद्धेल्लगा गोयमा असंखेज्जा केवतिया पुरेक्खडा गोयमा अनंता एवं जाव गेवेज्जगदेवाणं नवरं-मणूसाणं बद्धेल्लगा सिय संखेज्जा सिय असंखेज्जा, विजय-वेजयंत-जयंतअपराजियदेवाणं पुच्छा गोयमा अतीता अनंता बद्धेल्लगा असंखेज्जा पुरेक्खडा असंखेज्जा, सव्वट्ठसिद्धगदेवाणं पुच्छा गोयमा अतीता अनंता बद्धेल्लगासंखेज्जा पुरेक्खडा-संखेज्जा । एगमेगस्स णं भंते नेरइयस्स नेरइअत्ते केवतिया दव्विंदिया अतीता गोयमा अनंता केवतियाबद्धेल्लगा गोयमा अट्ठ केवतियापुरेक्खडा गोयमा कस्सइ अत्थि कस्सइ नत्थि जस्सत्थि अट्ठ वा सोलस वा चउवीसा वा संखेज्जा वा असंखेज्जा वा अनंता वा, एगमेगस्स णं भंते नेरइयस्स असुरकुमारत्ते केवतिया दव्विंदियाअतीता गोयमा अनंता केवतियाबद्धेल्लगा गोयमा नत्थि केवतियापुरेक्खडा गोयमा कस्सइ अत्थि कस्सइ नत्थि जस्सत्थि अट्ठ वा जाव अनंता वा एवंजाव थणियकुमारत्ते, एगमेगस्स णं भंते नेरइयस्स पुढविकाइयत्ते केवतिया दव्विंदिया अतीता गोयमा अनंता केवतियाबद्धेल्लगा गोयमा नत्थि केवतिया पुरेक्खडा गोयमा कस्सइ अत्थि कस्सइ नत्थि जस्सत्थि एक्को वा दो वा तिण्णि वा संखेज्जा वा असंखेज्जा वा अनंता वा एवं जाव वणप्फइकाइयत्ते, एगमेगस्स णं भंते नेरइयस्स बेइंदियत्ते केवतिया दव्विंदिया अतीता गोयमा अनंता केवतियाबद्धेल्लगा गोयमा नत्थि केवतिया पुरेक्खडा गोयमा कस्सइ अत्थि कस्सइ नत्थि जस्सत्थि दो वा चत्तारि वा छवा संखेज्जा वा असंखेज्जा वा अनंता वा एवं तेइंदियत्ते वि नवरं-पुरेक्खडा चत्तारि वा अट्ठ वा बारस वा संखेज्जा वा असंखेज्जा वा अनंता वा एवं चउरिदियत्ते वि नवरं-परेचउखडा छ वा बारस वा अद्वारस वा संखेज्जा व असंखेज्जा वा अनंता वा पंचेंदियतिरिक्खजोणियत्ते जहा- असुरकुमारत्ते, मणूसत्ते वि एवं चेव नवरंकेवतियापुरेक्खडा गोयमा अट्ठ वा सोलस वा चउवीसा वा संखेज्जा वा असंखेज्जा वा अनंता वा सव्वेसिं [दीपरत्नसागर संशोधितः] [116] [१५-पन्नवणा]
SR No.003729
Book TitleAgam 15 Pannavana Chauttham Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2013
Total Pages202
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 15, & agam_pragyapana
File Size3 MB
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