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________________ सिद्धाणं असिद्धाणं य कयरे कयरेहिंतो अप्पावा बया वा तुल्लावा विसेसाहिया वा गोयमा सव्वत्थोवा सिद्धा, असिद्धा अनंतगुणा । [३७०] अहवा दुविहा सव्वजीवा पन्नत्ता तं जहा- सइंदियाचेव अणिंदिया चेव सइंदिए णं भंते सइंदिएत्तिं कालतो केवचिरं होइ गोयमा सइंदिए दुविहे दुविहे पन्नत्ते-अणाइए वा अपज्जवसिए अणाइए वा सपज्जवसिए अणिदिए साइए वा अपज्जवसिए दोण्हवि अंतरं नत्थि, अप्पाबयंसव्वत्थोवा अणिंदिया, सइंदिया अनंतगुणा अहवा दुविहा सव्वजीवा पन्नत्ता तं जहा- सकाइया चेव अकाइया चेव सकाइयस्स संचिट्ठणंतरं जहा असिद्धस्स अकाइयस्स जहा सिद्धस्स, अप्पाबयंसव्वत्थोवा अकाइया, सकाइया अनंतगुणा अहवा दुविहा सव्वजीवा पन्नत्ता तं जहा- अजोगी य सजोगी य तघेव अहवा दुविहा सव्वजीवा पन्नत्ता तं जहा- सवेदगा चेव अवेदगाचे सवेदए णं भंते सवेदएत्ति कालतो केवचिरं होति गोयमा सवेदए तिविहे पन्नत्ते तं जहा- अणादीए वा अपज्जवसिते अणादीए वा सपज्जवसिए साइए वा सपज्जवसिए तत्थ णं जेसे साइए सपज्जवसिए से जहण्णेणं अंतोमुहत्तं उक्कोसेणं अनंतकालं-अनंताओ उस्सप्पिणी-ओसप्पिणीओ कालओ खेत्तओ अवड्ढं पोग्गलपरियट्टे देसूणं, अवदेए णं भंते अवेदएत्ति कालओ केवचिरं होति गोयमा अवेदए दुविहए पन्नत्ते तं जहा- साइए वा अपज्जवसिते साइएवा सपज्जवसिते तत्थ णं जेसे सादीए सपज्जवसिते से जहण्णेणं एक्कं समयं उक्कोसेणं अंतोमुहुत्तं, सवेदगस्स णं भंते केवतियं कालं अंतरं होति गोयमा अणादियस्स अपज्जवसियस्स नत्थि अंतरं अणादियस्स सपज्जवसियस्स नत्थि अंतरं सादीयस्स सपज्जवसियस्स जहण्णेणं एक्कं समयं उक्कोसेणं अंतोमुहत्तं, अवेदगस्स णं भंते केवतियं कालं अंतरं होइ गोयमा साइयस्स अपज्जवसियस्स नत्थि अंतरं साइयस्स सपज्जवसियस्स जहण्णेणं अंतोमुहत्तं उक्कोसेणं अनंतं कालं जाव अवड्ढं पोग्गलपरियढें देसूणं, अप्पाबहुग-सव्वत्थोवा अवेदगा, सवेदगा अनंतगुणा अहव दुविहा सव्वजीवा-सकसाई य अकसाई य सकसाई जहा सवेदए अकसाई जहा अवेदए, सव्वत्थोवा अकसाई, सकसाई अनंतगुणा अहवा दुविहा सव्वजीवा-सलेसा य अलेसा य जहा असिद्धा सिद्धा सव्वत्थोवा अलेसा सलेसा . [३७१] अहवा दुविहा सव्वजीवा पन्नत्ता तं जहा नाणी चेव अन्नाणी चेव नाणी णं भंते पडिवत्ति-१०/१ नाणीत्ति कालओ केवचिरं होति गोयमा नाणी दुविहे पन्नत्ते-सादीए वा अपज्जवसिए सादीए वा सपज्जवसे तत्थ णं जेसे सादीए सपज्जवसिते से जहण्णेणं अंतोमहत्तं उक्कोसेणं छावहिसागरोवमाई सातिरेगाइं अन्नाणी तिविहे जहा सवेदए, नाणिस्स ण भंते केवतियं कालं अंतरं होति गोयमा सादीयस्स अपज्जवसियस्स नत्थि अंतरं सादीयस्स सपज्जवसियस्स जहण्णेणं अंत उक्कोसेणं अनंतं कालं जाव अवड्ढं पोग्गलपरियढें देसूणं, अन्नाणिस्स अंतरं अणादीयस्स अपज्जवसियस्स नत्थि अंतरं अणादीयस्स सपज्जवसियस्स नत्थि अंतरं सादीयस्स सपज्जवसियस्स जहण्णेमं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं छावहिँ सागरोवमाइं साइरेगाइं अप्पाबहुयं-सव्वत्थोवा नाणी, अन्नाणी अनंतगुणा अहवा दुविहा सव्वजीवा पन्नत्ता-सागारोवउत्ता य अनागारोवउत्ता य संचिट्ठणा अंतरं जहन्नेणं उक्कोसेणवि अंतोमुहुत्तं अप्पाबहुंसव्वथत्थोवा अणागारोवउत्ता, सागरोवउत्ता संखेज्जगुणा । __ [३७२] अहवा दुविहा सव्वजीवा पन्नत्ता तं जहा- आहारगा चेव अणाहारगा चेव आहारए णं भंते आहारएत्ति कालओ केवचिरं होति गोयमा आहारए दुविहे पन्नत्ते तं जहा- छउमत्थ आहारए य केवलि आहारए य छउमत्थआहारगस्स जहण्णेणं खुड्डागं भवग्गहणं दुसमयूणं उक्कोसेणं असंखेज्जं कालं दीपरत्नसागर संशोधितः] [140] [१४-जीवाजीवाभिगम]
SR No.003727
Book TitleAgam 14 Jivajivabhigam Taiam Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2012
Total Pages152
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 14, & agam_jivajivabhigam
File Size3 MB
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