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________________ ( १ ) ॥ ढाल मेंदीनी ॥ ॥ सदगुरु पाय प्रणमी करी जी, समरी सरखती माय ॥ निरुपम नरपति रास रचुं रलियामणो जी, होम कहेवाय ॥ १ ॥ निरुपम संघपति पुण्यकरणी बहुली करी जी, राख्यां जगमां नाम ॥ निरु० ॥ एकणी ॥ हवे धवलकपुरमां ते वली जी, जिनमंदिर कीयां चार ॥ नि० ॥ दान अवारी मंत्री दीए जी, करी शेत्रुंजे यात्रा वार ॥ २ ॥ नि० ॥ मंत्री बहुविध धर्म कीयो जी, ते पुस्तक लिख्यां वखाण ॥ नि० ॥ हवे सहगुरु वंदन नित्य करे जी, नित्य सुणे निज गुरु वाण ॥ ३ ॥ नि० ॥ गुरु गिरुच्या गुण यागला जी, सामुद्रिक जाणे विवेक ॥ नि० ॥ रेखा फल त्यां वर्णवे जी, मंत्री आयु कह्युं ते बेक ॥ ४ ॥ नि० ॥ गुरुवचन श्रवणे सुणी जी, जाणी आयु प्रमाण ॥ नि० ॥ शुभ थानक विमलाचले जी, संघपति बहु मंगाण ॥ ५ ॥ नि० ॥ सबल आडंबर ते करी जी, संघपति शेत्रुंजे जाय ॥ नि० ॥ अनुक्रमे वलह चमारमी जी, व्हाण दीए वस्तT शाय ॥ ६ ॥ नि० ॥ एणे समे वात एकज हुइजी, सांजलो सहु नर नारी ॥ नि० ॥ संघ साथै सहु सांचरे जी, मनुष्य तिर्यंच नहीं पार ॥७ • Jain Educationa International For Personal and Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003691
Book TitleVastupal Tejpal no Ras
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Bhimsinh Manek
PublisherShravak Bhimsinh Manek
Publication Year1920
Total Pages110
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size4 MB
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