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________________ (१४२) डा राजारामेघरथ काया साजी करी, सुर पोहोतो नि ज ठाय ॥ रूडाराजा ॥॥ धन्य० ॥१३॥ संयम ली यो मेघरथ रायजी, एक लाख पूरवनुं श्राय ॥ रू डा राजा ॥ विश स्थानक विधे सेवियां, तीर्थंकर गो त्र बंधाय ॥ रूडा राजा॥धन्य॥१४॥श्ग्यारमेनवे श्री शांतिजी, पोहोता सारथ सिझ॥ रूडा राजा ॥ ते त्रीस सागर श्राऊ, सुख विलसे सुर रिक ॥ रू डा राजा। धन्य० ॥ १५ ॥ एक पारेवा दया थकी, बे पदवी पाम्या नरेश ॥ रूडाराजा॥ पांचमा चक्रवर्ती ऊपन्या, सोलमा शांति जिणंद ॥ रूडा राजा ॥ध न्य॥ १६॥ लाख वर्ष आयु शांतिजी, पोहोता शि वपुर वास ॥ रूडा राजा॥ जीव दया परसादथी, फ से सहु मननी आश ॥ रूडा राजा॥ धन्य० ॥१७॥ दया थकी नव निधि होवे, दया ते सुखनी खाण ॥ रूडा राजा॥ कोड जवांतरनी सगी, दया ते माता जा ण ॥ रूडा राजा॥ धन्य० ॥ १० ॥ गज जवे शशलो राखीयो, मेघकुमार गुणजाण ॥ रूडा राजा॥ श्रेणि करायजी सुत लह्या, पोहोता अनुत्तर विमान ॥ रूडा राजा॥ धन्य० ॥ १५ ॥ एम जाणी जवि दया पा खजो, बकायनी सुखदाय ॥ रूडा राजा ॥ नवा रे न. Jain Educationa International For Personal and Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003687
Book TitleStavanavali
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Bhimsinh Manek
PublisherShravak Bhimsinh Manek
Publication Year
Total Pages162
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size6 MB
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