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________________ तालिका - ३ Jain Education International १०२० । अभयचन्द्रसूरि [वि० सं० १४२४-१४६६] ३ प्रतिमालेख वि० सं० १४१२ में लिखित शांतिनाथचरित में उल्लिखित रामचन्द्रसूरि [वि० सं० १४९३] १ प्रतिमालेख वि० सं० १४५३ में इनके पठनार्थ न्यायावतारवृत्ति की प्रतिलिपि की गयी, वि० सं० १४९० में विक्रमचरित के रचनाकार शीलचन्द्रसूरि जयसार विनयरत्नसूरि पुण्यचन्द्रसूरि मुनिचन्द्रसूरि [प्रथम] [वि० सं० १५०४-२४] [वि० सं० १४८६ के ५ प्रतिमालेख प्रतिमालेख में उल्लिखित चन्द्रसूरि [वि० सं० १५२१] १ प्रतिमालेख For Private & Personal Use Only विजयचन्द्रसूरि [वि० सं० १५१३-१५२८] ३ प्रतिमालेख जयसिंहसूरि [वि० सं० १५०४ में लिखित सम्यकत्वरत्नमहोदधि की प्रशस्ति में उल्लिखित] उदयचन्द्रसूरि [वि० सं० १५५०-१५५३] २ प्रतिमालेख कीरति [वि० सं० १५३५ में आरामशोभाचौपाइ के रचनाकार] जैन श्वेताम्बर गच्छों का संक्षिप्त इतिहास मुनिचन्द्रसूरि [द्वितीय] [वि० सं० १५७५-१५७९] २ प्रतिमालेख मुनिराजसूरि [वि० सं० १५९२] १ प्रतिमालेख www.jainelibrary.org विद्याचन्द्रसूरि [वि० सं० १५९६-१६२४] ३ प्रतिमालेख वि० सं० १६१० में इनके उपदेश से आवश्यकनियुक्ति बालावबोध की प्रतिलिपि की गयी
SR No.003615
Book TitleJain Shwetambar Gaccho ka Sankshipta Itihas Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShivprasad
PublisherOmkarsuri Gyanmandir Surat
Publication Year2009
Total Pages698
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size19 MB
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