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________________ ९३४ जैन श्वेताम्बर गच्छों का संक्षिप्त इतिहास [वि० सं० १२२३ / ई० सन् ११६७ में प्रश्नोत्तररत्नमालावृत्ति के रचनाकार ] हेमप्रभसूर अममस्वामिचरितमहाकाव्य - पूर्णिमागच्छीय समुद्रघोषसूरि के विद्वान् शिष्य मुनिरत्नसूरि द्वारा यह प्रसिद्ध कृति वि० सं० १२५२ / ई० सन् १९९६ में रची गयी है। रचना के अन्त में प्रशस्ति के अन्तर्गत ग्रन्थकार ने अपनी गुरु-परम्परा दी है, जो इस प्रकार है : Jain Education International चन्द्रप्रभसूरि [पूर्णिमागच्छ के प्रवर्तक] | धर्मघोषसूरि समुद्रघोषसूरि | मुनिरत्नसूरि प्रश्नोत्तरसंग्रहवृत्ति - पूर्णिमागच्छीय मलयचन्द्रसूरि ने वि० सं० १२६० / ई० सन् १२०४ में अपने गुरु मानतुंगसूरि द्वारा रचित जयन्तीचरित्र अपरनाम प्रश्नोत्तरसंग्रह पर वृत्ति की रचना की । वृत्तिकार के गुरु- परम्परा इस प्रकार मिलती है: अ [वि० सं० ११५२/ ई० सन् ११९६ में अममस्वामिचरित महाकाव्य के रचनाकार ] सर्वदेवसूरि I जयसिंहसूरि I For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003615
Book TitleJain Shwetambar Gaccho ka Sankshipta Itihas Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShivprasad
PublisherOmkarsuri Gyanmandir Surat
Publication Year2009
Total Pages698
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size19 MB
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