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________________ ५३६ जैन श्वेताम्बर गच्छों का संक्षिप्त इतिहास के शिष्य शिचन्द्रगणिमहत्तर हुए, जिनके नाग, वृन्द, दुर्ग, मम्मट, अग्निशर्मा और वटेश्वर ये ६ शिष्य थे । वटेश्वर क्षमाश्रमण ने आकाशवप्रनगर [अम्बरकोट/ अमरकोट] में जिनमंदिर का निर्माण कराया । वटेश्वर के शिष्य तत्त्वाचार्य हुए । कुवलयमालाकहा के रचनाकार दाक्षिण्यचिह्न उद्योतनसूरि इन्हीं तत्त्वाचार्य के शिष्य थे। इस बात को प्रस्तुत तालिका से भली-भांति समझा जा सकता है : वाचक हरिगुप्त [तोरमाण के गुरु] कवि देवगुप्त [सुपुरुषचरिय के रचनाकार] शिवचन्द्रगणिमहत्तर नाग वृन्द दुर्ग मम्मट अग्निशर्मा वटेश्वर क्षमाश्रमण [आकाशवप्रनगर। अम्बरकोट। अमरकोट में जिनमंदिर के निर्माता] तत्त्वाचार्य दाक्षिण्यचिह्न उद्योतनसूरि [शक सं ०७०० / ई० सन् ७७८ में कुवलयमालाकहा के रचनाकार] Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003614
Book TitleJain Shwetambar Gaccho ka Sankshipta Itihas Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShivprasad
PublisherOmkarsuri Gyanmandir Surat
Publication Year2009
Total Pages714
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size19 MB
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