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________________ ८८८ खाइय-खेत्त खाइय (खादित) उ ११५१,५४,७६,७९ खाणु (स्थाणु) ज १३६,४।२७७ खाणुबहुल (स्थाणुबहल) ज ११८ खात (खात) प २१३० खाय (खात) २।३१,४१ ज ३।३२ खार (क्षार) प १७६ खारतउसी (क्षारत्रयुपी) प १७।१३० खारतउसीफल (क्षारत्रपुषीफल) प १७।१३० खारमेघ (क्षारमेघ) ज २०४२,१३१ खारोदय (क्षारोदक) प ११२३ खासीय (खासिक) प १८६ खिखिणी (किंकणी) ज ३।३५ खित (खिस्) खिसंति उ ३।११७ खिसिज्जमाण (खिस्यमान) उ ३।११८,१२३ खिप्पामेव (क्षिप्रमेव) प २८।१०५,३४११६,२१, २४ ज २।९५,६७,१०१,१०५,१०७,१०६, १११११४,११५,१४१ से १४५,३७,१२, १५,१८,१६,२१,२५,२८,३१,३२,३४,३८, ३६.४६,४६,५२,५३,५८,६१,६२,६६,६६, ७०,७४, ७७,८०,८३,६१,६६,६६,१००, ११५,११८,१२१,१२४,१२८,१३२,१४१, । १४२.१४७,१६० से १६५.१६८,१७३,१७५, १८०,१८१,१८३,१६१,१६६,२०७.२१२, २१३,५॥३,७,१४,१५,२२,२८,५४,६८रो ७०,७२,७३ खीण (क्षीण) ज २१६३१२२५ खीणकषाय (क्षीणकापाय) प १११०२,१०४ से ११०,११५.११७ से १२३ खीर (खीर) प ११४२११ लौकी खीर (क्षीर) प १५१५५११७।११६,१२८ सू १०।१२० उ ३३११४,१३० खीरकाओनी (श्रीरकाकोली) १११४८५ खीरपूर (क्षीरपुर) प १७।१२८ खीरमेह (क्षी मेघ) ज २११४२,१४३ खीरवर (लीवर) सू १६६३१ खीरिणी (क्षीरिणी) प ११३५२ खीरोद (क्षीरोद) ज २।६७,९८ खीरोदग (क्षीरोदक) ज २।६७ से १००,१११, ११२; ५१५५ खीरोदय (क्षीरोदक) प ११२३ ज ५१५५ खीरोदा (क्षीरोदा) ज ४।२१२ खीरोया (क्षीरोदा) ज ४।२१२ खोलग (कीलक) ज ७।१३३।३ खीलगसंठिय (कीलकसंस्थित) सू १०।४८ खीलच्छाया (कीलछाया) सूहा४ खीलिया (कीलिका) प २३।४५,६८ खु (खलु) ज ३।२४ खुज्ज (कुटज) प १५॥३५; २३।४६ ज ३।११।१,८७ खुज्जा (कुब्जा) उ १।१६ खुड्ड (क्षुद्र) प ३६।८१ ज ११७, ४१६०,८३,११३ खुड्डग (क्षुद्रक) ज ४।१३६ खुड्डार (क्षुद्रतर) ज ४१५४ खुड्डाग (क्षुद्रक) प १८९५ खुड्डाय (क्षुद्रक) सू १।१४ खुड्डिया (क्षुद्रिका) ज ४।६०,८३,११३ खुभिय (क्षभित) ज २६५ खुर (खुर) ज ३।३०,७१७८ खुरप्प (क्षुरप्र) प १२० से २७; १५१५ ज ३१३० खुल्ला (क्षुल्लक) ५ ११४६ खुहा (क्षुधा) ३१२२१११ उ ३११२८ खेड (खेट) प १७४ ज २२२,१३१,३।१८,३१, ८१,१८०,१८५,२०६,२२१ उ ३।१०१ खेडग (खेटक) ज ३।३५ खेडय (खेटक) ज' ३।३१ खेड्डकारग (खेलकारक) ज ३११७८ खेत्त (क्षेत्र) प २१६४,३।११२,१२।३२; १४१५, १४।१८।११५।५२;१७१०६ से १११; २८।२०,३२,६६,३३१२,३,१०,१२,१३,१५ से १८;३६॥५६,६०,६६ से ६८,७० से ७४ ज २१६६३।३७२० से २५,२६,५२,५४, ७६ से ८२,६५,९६ सू १११४; १३,३११; Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003555
Book TitleUvangsuttani Part 05
Original Sutra AuthorN/A
AuthorTulsi Acharya, Mahapragna Acharya
PublisherJain Vishva Bharati
Publication Year1989
Total Pages1178
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, & Canon
File Size22 MB
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