________________ प्रथम प्राभेत [प्रथम प्राभृतप्राभूत वीरथुई जयइ नव-नलिण-कुवलय, वियसिय-सयवत्त-पत्तल-दलच्छो / वीरो गइंद-मयंगल, सललिय-गयविक्कमो भयवं // 1 // पंच-पय-वंदणं जोइसगणराय-पण्णत्ति-परूवण-पइण्णा य नमिऊण असुर-सुर-गरुल-भुयंग-परिवदिए गयकिलेसे // अरिहे सिद्धायरिय-उवज्झाए सव्वसाहू य॥२॥ फुड-वियड-पागडत्थं, बुच्छं पुव्व-सुय-सार-णिस्संदं // सुहुमं गणिणोबइठें, जोइसगणराय-पण्णत्ति // 3 // नामेण "इंदभूई" ति, गोयमो वंदिऊण तिविहेणं // पुच्छइ जिणवरवसह, जोइसरायस्स पत्ति // 4 // 1-2. तेणं कालेणं तेणं समएणं "मिहिला" णामं णयरी होत्था, वण्णओ। तोसे णं मिहिलाए णयरीए बहिया उत्तरपुरस्थिमे दिसिभाए, एस्थ णं "माणिभद्दे" णामं चेइए होत्था, वण्णओ। तीसे णं मिहिलाए "जियसत्तू" राया परिवसइ, वण्णओ। तस्स णं जियसत्तुस्स रण्णो "धारिणी" णामं देवी होत्था, वण्णभो। तेणं कालेणं, तेणं सभएणं तंमि माणिभद्दे चेइए सामी समोसढे, वण्णओ। [क] परिसा णिग्गया, धम्मो कहिओ। . [ख] परिसा पडिगया। [ग] राया जामेव दिसि पाउन्भूए, तामेव दिसि पडिगए। तेणं कालेणं, तेणं समएणं समणस्स भगवओ महावीरस्स जे? अंतेवासी "इंदभूई" णामं अणगारे जाव पंजलिउडे पज्जुवासमाणे एवं वयासी Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org