________________ परिशिष्ट] [223 प्राप्त होता है। जम्बूद्वीप की परिधि 316228 योजन है। उसे 2 से गुणा करने पर 632456 योजन होते हैं / जिन्हें 1063245 योजन 6/10 भाग सर्वबाह्य बाहा का परिमाण होता है। अन्धकार संस्थिति की लम्बाई तापमान की लम्बाई जितनी जाननी चाहिए। सर्वाभ्यन्तरमंडल में जो तापमान की स्थिति है वह सर्वबाह्य मंडल में अन्धकार की स्थिति जानना चाहिये। सर्वाभ्यन्तरमंडल में जो अन्धकार की स्थिति है वह सर्वबाह्यमंडल में ताप की स्थिति चाहिए। अथर्थात सर्वबाह्यमंडल में तापमान की प्राभ्यान्तर बाहा 6324 योजन६/१० भाग है / सर्वबाह्य बाहा 63245 योजन 6/10 भाग है / तापमान की लम्बाई 78333.333 योजन है। अन्धकार की संस्थिति सर्वबाह्य मंडल में आभ्यान्तर बाहा 6486 योजन 9/10 भाग है। शेष बाहा 64868 योजन 4/10 भाग है / अन्धकार संस्थिति की लम्बाई 78333.333 योजन है। सूत्र 25 समाप्त चतुर्थ प्राभृत समाप्त / दसवें प्राभूत का दूसरा प्राभूत-प्राभत अहोरात्र के 67 भाग की कल्पना करनी चाहिये। अहोरात्र के 67 भाग नक्षत्र संख्या चन्द्र के साथ में से भाग संख्या योग मुहूर्त 21 9 मु. 27/67 नक्षत्रनाम अभिजित 33 भाग 1/2 6 15 मु. शतभिषा भरणी, प्रार्दा आश्लेषा, स्वाति ज्येष्ठा 67 15 30 मु. 30 मु. श्रवण, धनिष्ठा, पूर्वा भा० रेवती, अश्विनी, कृतिका मृगशिर, पुष्य, मघा, पू० फा० हस्त, चित्रा, अनुराधा, मूल, पूर्वाषाढा उ० भा० रोहिणी पुन० उ. फा. विशाखा. उत्तराषाढा. 100 भाग 1/2 45 मु. Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org