________________ उन्नीसवां प्राभृत] [195 प. ता रुयए णं दोवे केवइयं समचक्कवालविक्खंभेणं, केवइयं परिक्लेवेणं ? उ. ता असंखेज्जाई जोयणसहस्साई चक्कवालविक्खंभेणं, ____ असंखेज्जाइं जोयणसहस्साई परिक्खेवेणं आहिए ति वएज्जा / प. ता रुयगे णं दोवे केवइया चंदा पभासेसु वा जाव केवइया तारागणकोडिकोडीओ सोभं सो सु सोभिस्संति वा? उ. ता रुयगे णं दीवे असंखेज्जा चंदा पभासेंसु वा जाव असंखेज्जाओ तारागण-कोडि कोडोओ सोभं सोभिस्संति वा। एवं रुयगोदे समुद्दे, 1. रुयगवरे दीवे, 2. रुयगवरोदे समुद्दे, 1. रुयगवरोभासे दोवे. 2. रुयगवरभासोदे समुद्दे / एवं तिपडोयारा दीव-समुद्दा णायव्वा, जाव, 1. सूरे दीवे, 2. सरोदे समुद्दे, 1. सुरवरे दीवे, 2. सूरवरोदे समुद्दे, 1. सूरवरोभासे दीवे, 2. सूरवरभासोदे समुद्दे / सन्वेसि विक्खंभ-परिक्खेवो जोइसाई रुयगवरदीवसरिसाई। ता सूरवरोभासोद णं समुदं देवे णामं दोवे बट्टे क्लायाकारसंठाणसंठिए सव्वमओ समंता संपरिक्खित्तागं चिट्टइ। प. ता देवे णं दीवे कि समचक्कवालसंठिए, विसमचक्कवालसंठिए ? उ. ता समचक्कवालसंठिए नो विसमचक्कवालसंठिए। प. ता देवे णं दीवे केवइयं चक्कवालविक्खंभेणं केवइयं परिक्खेवेणं ? आहिए त्ति वएज्जा। उ. ता असंखेज्जाई जोयणसहस्साई चक्कवालविक्खंभेणं, असंखेज्जाई जोयणसहस्साई परिक्खेवेणं आहिए त्ति वएज्जा / 5. ता देवे णं दोवे केवइया चंदा पभासेंस वा जाव केवइया तारागण-कोडिकोडीओ सोभं सोभिस्संति वा? उ. ता देवे गं दोवे असंखेज्जा चंदा पभासेंसु वा जाव असंखेज्जाओ तारागणकोडिकोडीओ सोभं सोभिस्संति वा / Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org