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________________ 178] [सूर्यप्रज्ञप्तिसूत्र चंदस्स अग्गमहिसोमो देवीपरिवारविउवणा य 97. प. ता चंदस्स णं जोइसिदस्स जोइसरण्णो कइ अग्गम हिसीओ पण्णताओ? उ. ता चत्तारि अग्गमहिसीओ पण्णत्ताओ, तंजहा 1. चंदप्पभा, 2. दोसिणाभा, 3. अच्चिमाली, 4. पभंकरा / तत्थ णं एगमेगाए देवीए चत्तारि देवीसाहस्सीपरिवारो पण्णत्तो। प. पमू णं ताओ एगमेगा देवी अण्णाई चत्तारि चत्तारि देवीसहस्साई परिवारं विउवित्तए ? उ. पभू णं ताओ एगमेगा देवी देवीसाहस्सीपरिवारं विउवित्तए। _____एवामेव सपुम्वावरेणं सोलसदेवीसहस्सा पण्णत्ता, से तं तुडिए / प. ता पमू णं चंदे जोइसिदे जोइसराया चंदडिसए विमाणे सभाए सुहम्माए तडिएणं सद्धि दिवाई भोगभोगाइं भुजमाणे विहरित्तए ? उ. णो इणठे समझें। प. ता कहं ते णो पमू जोइसिदे जोइसराया चंदडिसए विमाणे सभाए सुहम्माए तुडिएणं सद्धि दिव्वाई भोगभोगाई भुंजमाणे विहरित्तए ? उ. क. ता चंदस्स णं जोइसिंदस्स जोइसरण्णो चंदडिसए विमाणे समाए सुहम्माए माणव. एसु चेइयखंभेसु वइरामएसु गोलबट्टसमुग्गएसु बहवे जिणसकहाओ संणिपिखत्ताओ चिट्ठति / ताओ णं चंदस्स जोइसिंदस्स जोइसरण्णो अणेसि च बहणं जोइसियाणं देवाण य, देवीण य अच्चणिज्जाओ वंदणिज्जाओ पूणिज्जाओ सक्कारणिज्जाओ सम्माणणिज्जाओ, कल्लाणं मंगलं देवयं चेइयं पज्जुवासणिज्जाओ। एवं खलु णो पभू चंदे जोइसिदे जोइसराया चंदडिसए विमाणे सभाए सुहम्माए तुडिएण सद्धि दिन्वाई भोगभोगाई भुजमाणे विहरित्तए। ख. पभू णं चंदे जोइसिदे जोइसराया चंदडिसए विमाणे सभाए सुहम्माए चंदसि सीहा सणंसि चहि सामाणियसाहस्सीहि, चहिं अग्गमहिसीहि सपरिवाराहि, तिहिं परिसाहि, सहि अणिएहि, सहि अणियाहिवईहि, सोलसहिं आयरक्ख-देवसाहस्सीहि, अण्णेहि य बहूहि जोइसिएहिं देवेहिं देवीहि य सद्धि संपरिवुडे, महयाहयपट्ट-गोय-वाइय-तंती-तल-ताल-तुडिय-घण-मुइंग-पडुप्पवाइय-रवेणं, दिव्वाई भोग Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003484
Book TitleAgam 16 17 Suryaprajnapti Chandraprajnapti Sutra - Swe Mu Pu Agam 16 17
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Kanhaiyalal Maharaj, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1989
Total Pages300
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size7 MB
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