________________ सत्तरहवां प्राभूत] . 25. [165 एगे पुण एवमाहंसुता अणुओसप्पिणी, उस्सपिणीमेव चंदिम-सूरिया अण्णे घयंति, अण्णे उववज्जंति, एगे एवमाहंसु। 10. ता अणुवाससयमेव, एगे पुण एवमासु...११. ता अणुवाससहस्समेव, एगे पुण एवमाहंसु१२. ता अणु वाससयसहस्समेव, एगे पुण एवमाहंसु१३. ता अणुपुब्वमेव, एगे पुण एवमाहंसु१४. ता अणपुव्वसयमेव, एगे पुण एवमासु१५. ता अणुपुन्वसहस्समेव, एगे पुण एवमाहंसु--- 16. ता अणुपुत्वसयसहस्समेव. एगे पुण एवमाहंसु१७. ता अणुपलिअोवमेव, एगे पुण एवमाहंसु१८. ता अणुपलिग्रोवमसयमेव, एगे पुण एवमाहंसु१९. ता अणुपलिग्रोवमसहस्समेव एगे पुण एवमासु२०. ता अणुपलिग्रोवममयसहस्ममेव, एगे पुम एषमाहंसु२१. ता अणुसागरोवमेव, एगे पुण एवमाहंसु२२. ता अणुसागरोबमसयमेव, एगे पुण एवमाहंसु२३. ता अणुसागरोवमसहस्ममेव / / एगे पुण एवमासु२४. ता अणुसागरोवममयसहस्समेव / पंचविशतितमं प्रतिपत्तिसूत्रं तु साक्षादेव सुत्रकृता शितम् तदेवमुक्ताः परतीथिकप्रतिपत्तयः / -~-टीका. Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org