________________ 162] [सूर्यप्राप्तिसूत्र 2 प. ता एगमेगेणं अहोरत्तेणं सूरे कइ मंडलाई चरइ ? उ. ता एगं अद्धमंडलं चरइ / 3 प. ता एगमेगेणं अहोरत्तेणं णक्खत्ते कइ मंडलाइं चरइ ? उ. ता एगं अद्धमंडलं चरइ, दोहि भागेहि अहियं सतहिं बत्तीसेहिं सएहि अद्धमंडलं छेत्ता। एगमेगे मंडले चंद-सूर-णक्खत्ताणं अहोरत्ते चारं१ प. ता एगमेगं मंडलं चंदे कतिहि अहोरहि चरइ ? उ. ता दोहिं अहोरत्तेहिं चरइ, एक्कतोसेहि भारहि अहिएहि चउहि चोयालेहि सएहि __राइंदिएहि छेत्ता। 2 प. ता एगमेगं मंडलं सूरे कतिहि अहोरत्तेहि चरइ ? उ. ता दोहि अहोरत्तेहि चरइ / 3 प. ता एगमेगं मंडलं णक्खत्ते कतिहिं अहोरतेहि चरइ? उ. ता दोहि अहोरत्तेहि चरइ, दोहिं भागेहि ऊर्णेहि तिहि सत्तस?हि सहिं राई दिएहि छेत्ता। एगमेगजुगे चंद-सूर-णक्खत्ताणं मंडलचारं१ प. ता जुगे णं चंदे कइ मंडलाइं चरइ ? उ. ता अट्ठचुल्लसीए मंडलसए चरइ / 2 प. ता जुगे णं सूरे कइ मंडलाई चरइ ? उ. ता णव-पण्णरसमंडलसए चरइ / प. ता जुगे णं णक्खत्ते कइ मंडलाई चरइ ? उ. ता अट्ठारस पणतीसे दुभागमंडलसए चरइ / इच्चेसा मुहुत्तगई रिक्ख-उडुमास-राइंदिय-जुगमंडल-पविभत्ती सिग्घगई वत्थ आहिए त्ति बेमि। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org