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________________ दशम प्रात [सत्तरहवां प्राभृतप्राभृत] णक्खत्ताणं भोयणं कज्जसिद्धी य५१. प. ता कहं ते भोयणा ? प्राहिए ति वएज्जा, उ. ता एएसि णं अट्ठावीसाए णं णक्खत्ताणं मज्झे-- 1. कत्तियाहि दधिणा भोच्चा कज्जं साधेति, 2. रोहिणीहि वसभ-मंसं भोच्चा कज्जं साधेति, 3. मिगसिरे णं (संठाणाहि) मिग-मंसं' भोच्चा कज्जं साति, 4. अद्दाहिं णवणोएणं भोच्चा कज्ज साधेति, 5. पुणवसुणाऽथ घएणं भोच्चा कज्जं साति, 6. पुस्से णं खोरेण भोच्चा कज्जं साति, 7. अस्सेसाए दीवग-मंसं भोच्चा कज्ज साधेति, 8. महाहि कसोति भोच्चा कज्ज साधेति, 6. पुव्वाहि फग्गुणोहिं मेढक-मंसं भोच्चा कज्जं साधेति, 10. उत्तराहि फग्गुणोहि णक्खो-मंसं भोच्चा कज्जं साधेति, 11. हत्थेण वत्थाणोएणं भोच्चा कज्ज सार्धति, 12. चित्ताहि मुग्ग-सूवेणं भोच्चा कज्ज साधेति, 13. साइणा फलाई भोच्चा कज्ज साधेति / 14. विसाहाहिं आसित्तियाओ भोच्चा कज्ज साधेति, 15. अणुराहाहि मिस्सकर भोच्चा कज्जं साधे ति, 16. जेट्टाहि कोलट्ठिएणं भोच्चा कज्ज साधेति, 17. मूलेणं मूलापन्नेणं भोच्चा कज्ज साधेति, 1. रोहिणीहिं चसम-मंसं (चमसमंस) भोच्चा कज्ज साधेति, प्रा. स. समिति से प्रकाशित प्रति के पृष्ठ 151 पर (पाठान्तर) है। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003484
Book TitleAgam 16 17 Suryaprajnapti Chandraprajnapti Sutra - Swe Mu Pu Agam 16 17
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Kanhaiyalal Maharaj, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1989
Total Pages300
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size7 MB
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