________________ दशम प्राभूत [सप्तम प्राभृतप्राभृत दुवालस पुणिमासु अमावासासु य चंदेण-णक्खत्तसंजोगो 40. 1. प. ता कहं ते सण्णिवाए आहिए ति वएज्जा ? उ. [क] ता जया णं साविट्ठी पुण्णिमा भवइ, तया णं माहो अमावासा भवइ / [ख] ता जया णं माही पुणिमा भवइ, तया णं साविट्ठी अमावासा भवइ / [क] ता जया णं पुट्ठवई पुणिमा भवइ, तया णं फग्गुणी अमावासा भवइ / [ख] ता जया णं फरगुणी पुणिमा भवइ, तया णं पुट्टवई अमावासा भवइ / [क] ता जया णं आसोई पुण्णिमा भवइ, तया णं चेत्ती अमावासा भवइ / ता जया णं चेत्ती पुण्णिमा भवइ, तया णं आसोई अमावासा भवइ / ता जया गं कत्तियो पुण्णिमा भवइ, तया णं वेसाही अमावासा भवइ / [ख] ता जया णं वेसाही पुणिमा भवइ, तया णं कत्तियो अमावासा भवइ / ता जया णं मग्गसिरी पुणिमा भवइ, तया में जेट्टामूली अमावासा भवइ / ता जया णं जेट्ठामूली पुणिमा भवइ तया णं मग्गसिरी अमावासा भवइ / [क] ता जया णं पोसी पुणिमा भवइ, तया णं आसाढी अमावासा भवइ / [ख] ता जया णं प्रासाढी पुण्णिमा भवइ, तया णं पोसी अमावासा भवइ / ma Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org