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________________ सोलहवाँ प्रयोगपद] [223 अथवा ४–अनेक आहारकमिश्रशरीरकायप्रयोगी और अनेक कार्मणशरीरकायप्रयोगी होते हैं / ये चार भंग हैं / इस प्रकार (द्विकसंयोगी कुल) चौबीस भंग हुए। अथवा १एक औदारिकशरीरकायप्रयोगी, एक आहारकशरीरकायप्रयोगी और एक पाहारकमिश्रशरीरकायप्रयोगी होता है, अथवा २--एक औदारिक मिश्रशरीरकायप्रयोगी, एक ग्राहारकशरीरकायप्रयोगी और अनेक आहारकमिश्रशरीरकायप्रयोगी होते हैं, ३–अथवा एक प्रौदारिकमिश्रशरीरकायप्रयोगी, अनेक आहारक शरीरकायप्रयोगी और एक आहारकमिश्रशरीरकायप्रयोगी होता है: अथवा ४–एक औदारिकमिश्रशरीरकायप्रयोगी अनेक प्राहारकशरीरकायप्रयोगी और अनेक आहारकमिश्रशरीरकायप्रयोगी होते हैं; अथवा 5. अनेक औदारिकमिश्रशरीरकायप्रयोगी, एक आहारकशरीरकायप्रयोगी और एक ग्राहारकमिश्रशरीरकायप्रयोगी होता है; अथवा ६-अनेक औदारिकमिश्रशरीरकायप्रयोगी, एक आहारकशरीरकायप्रयोगी और अनेक आहारकमिश्रशरीरकायप्रयोगी होते हैं; अथवा ७–अनेक औदारिकमिश्रशरीरकायप्रयोगी, अनेक प्राहारकशरीरकायप्रयोगी और एक पाहारकमिश्रशरीरकायप्रयोगी होता है, अथवा ५-अनेक औदारिक मिश्रशरीरकायप्रयोगी, अनेक आहारकशरीरकायप्रयोगी और अनेक आहारकमिश्रशरीरकायप्रयोगी होते हैं / (इस प्रकार) ये आठ भंग हैं। अथवा १–एक औदारिकमिश्रशरीरकायप्रयोगी, एक आहारकशरीरकायप्रयोगी और एक कार्मणशरीरकाय-प्रयोगी होता है, २-अथवा एक औदारिकमिश्रशरीरकायप्रयोगी, एक आहारकशरीरकायप्रयोगी और अनेक कार्मणशरीरकायप्रयोगी होते हैं, अथवा ३–एक औदारिक मिश्रशरीरकाय-प्रयोगी, अनेक आहारकशरीरकायप्रयोगी और एक कार्मण शरीरकायप्रयोगी होता है; अथवा ४---एक औदारिकमिश्रशरीरकायप्रयोगी,अनेक आहारक शरीरकायप्रयोगी और अनेक कार्मणशरीरकायप्रयोगी होते हैं; अथवा ५-अनेक औदारिकमिश्रशरीरकायप्रयोगी, एक पाहारकशरीरकायप्रयोगी और एक कार्मणशरीरकायप्रयोगी होता है, अथवा ६-अनेक औदारिकमिश्रशरीरकायप्रयोगी, और एक प्राहारकशरीरकायप्रयोगी और अनेक कार्मणशरीरकायप्रयोगी होते हैं, अथवा ७---अनेक औदारिकमिश्रशरीरकायप्रयोगी, अनेक आहारकशरीरकायप्रयोगी और एक कार्मणशरीरकायप्रयोगी होता है: अथवा ८-अनेक औदारिकमिश्रशरीरकायप्रयोगी, अनेक आहारकशरीरकायप्रयोगी और अनेक कार्मणशरीरकायप्रयोगी होते हैं। (इस प्रकार) ये आठ भंग हैं। अथवा १–एक औदारिक मिश्रशरीरकायप्रयोगी, एक आहारकमिश्रशरीरकायप्रयोगी और एक कार्मणशरीरकायप्रयोगी होता है; अथवा २–एक औदारिकमिश्रशरीरकायप्रयोगी, एक आहारकमिश्रशरीरकायप्रयोगी और अनेक कार्मणशरीरकायप्रयोगी होते हैं, ३-अथवा एक औदारिक मिश्रशरीरकायप्रयोगी, अनेक आहारकमिश्रशरीरकायप्रयोगी और एक कार्मणशरीरकायप्रयोगी होता है; अथवा ४-एक औदारिकमिश्रशरीरकायप्रयोगी, अनेक आहारकमिश्रशरीरकायप्रयोगी, और अनेक कार्मणशरीरकायप्रयोगो होते हैं; अथवा ५–अनेक औदारिकमिश्रशरीरकायप्रयोगी, एक आहारकमिश्रशरीरकायप्रयोगी, और एक कार्मणशरीरकायप्रयोगी होते हैं; अथवा ६-अनेक औदारिकमिश्रशरीरकायप्रयोगी, एक आहारकमिश्रशरीरकायप्रयोगी, और अनेक कार्मणशरीरकायप्रयोगी होते हैं, अथवा ७–अनेक औदारिकमिश्रशरीर कायप्रयोगी, अनेक आहारकमिश्रशरीरकायप्रयोगी और एक कार्मणशरीरकायप्रयोगी होता है; अथवा ८–अनेक औदारिकमिश्रशरीरकायप्रयोगी, अनेक आहारकमिवशरीरकायप्रयोगी और अनेक कार्मणशरीरकायप्रयोगी होते हैं / ये 8 भंग हैं। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003483
Book TitleAgam 15 Upang 04 Pragnapana Sutra Stahanakvasi
Original Sutra AuthorShyamacharya
AuthorMadhukarmuni, Gyanmuni, Shreechand Surana, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1983
Total Pages1524
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size37 MB
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