________________ अभिमत 0 प्रख्यात विद्वान् प्रो. डॉ. जगदीशचन्द्रजी जैन, बम्बई ......"कितना श्रम किया है सम्पादकों, लेखकों, विवेचन-कर्ताओं एवं प्रस्तावना के लेखकों ने, यह जान कर प्रसन्नता होती है / इस महती योजना का श्रेय है योजना के संयोजक एवं प्रधान सम्पादक युवाचार्य श्री मधुकर मुनिजी को, जो दुर्भाग्य से आज हमारे बीच नहीं रहे हैं। उनके प्रति शतशत श्रद्धाञ्जलियाँ ! समस्त आगमों की छपाई, साजसज्जा आदि खूब ही आकर्षक है और आजकल की मंहगाई को देखते हुए उनका मूल्य नहीं के बराबर है। जैन आगम-साहित्य को प्रकाश में लाने का आप महान् कार्य कर मैं पुनः आगमप्रकाशन समिति के उत्साही कार्यकर्ताओं एवं हजारीमल स्मृतिप्रकाशन के महानुभावों, विशेषतः इस महती योजना के कार्यवाहक कर्मठ दिवंगत युवाचार्य श्रीमधुकर मुनिजी को हार्दिक साधुवाद देता हूँ जो उन्होंने इस गुरुतर कार्य का भार वहन करने का उत्तरदायित्व अपने कंधों पर लेकर ज्ञानके प्रचार और प्रसार की योजना को कार्यान्वित कर जनसमूह को लाभान्वित किया। Jain Education International