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________________ 5 ऋम कर्मप्रकृति का नाम जघन्य स्थिति उत्कृष्ट स्थिति अबाधाकाल निषेककाल ] Jain Education International 17-18 हास्य और रति (मोहनीय) 10 कोडाकोड़ी सागरोपम 1000 वर्ष पल्योपम के असंख्यातवें भाग कम सागरोपम का भाग पल्योपम के असंख्यातवें भाग कम सागरोपम का भाग अन्तमहतं अधिक 10 हजार वर्ष उत्कृष्ट स्थिति में से 1000 वर्ष कम उत्कृष्ट स्थिति में 2 हजार वर्ष कम 19-22 अरति, भय, शोक, जुगुप्सा 20 कोड़ाकोडी सागरोपम 2000 वर्ष 23 नारकाय करोड़ पूर्व के तृतीय भाग अधिक 33 सागरोपम करोड़ पूर्व का तीसरा भाग अधिक 3 पल्योपम 24 तिर्यञ्चायु अन्तर्मुहूर्त 25 मनुष्यायु 26 देवायु अन्तर्महत अधिक 10 हजार वर्ष करोड़ पूर्व के तृतीय भाग अधिक 33 सागरोपम की 20 कोडाकोडी सागरोपम 2000 वर्ष 27 नरकगतिनामकर्म उत्कृष्ट स्थिति में 2 हजार वर्ष कम 28 तिर्यञ्चगतिनामकर्म For Private & Personal Use Only 29 मनुष्यगतिनामकर्म 15 कोड़ाकोडी सागरोपम 1500 वर्ष 30 देवगतिनामकर्म पल्योपम के असंख्यातवें भाग कम सहस्रसागरोपम का भाग पल्योपम के असंख्यातवें भाग कम सागरोपम का भाग पल्योपम के असंख्यातवें भाग कम सागरोपम का " भाग पल्योपम के असंख्यातवें भाग कम सहस्र सागरोपम काभाग पल्योपम के असंख्यातवें भाग कम सागरोपम का भाग पल्योपम के असंख्यातवें भाग कम सागरोपम का भाग 10 कोडाकोड़ी सागरोपम 1000 वर्ष उत्कृष्ट स्थिति में 15000 वर्ष कम उत्कृष्ट स्थिति में 1 हजार वर्ष कम उत्कृष्ट स्थिति में 2 हजार वर्ष कम उत्कृष्ट स्थिति में 1800 वर्ष कम 31 एकेन्द्रियजातिनामकर्म 20 कोडाकोड़ी सागरोपम 2000 वर्ष 32 द्वीन्द्रियजातिनामकर्म 18 कोडाकोड़ी सागरोपम 1800 इर्ष " 33 त्रीन्द्रियजाति नामकर्म 34 चतुरिन्द्रियजातिनामकर्म 35 पंचेन्द्रियजातिनामकर्म " " पल्योपम के असंख्यातवें भाग कम सागरोपम का भाग 20 कोड़ाकोड़ी सागरोपम 2000 वर्ष उत्कृष्ट स्थिति में 2 हजार वर्ष कम 36 औदारिक शरीरनामकर्म 37 वैक्रिय शरीरनामकर्म // www.jainelibrary.org पल्योपम के असंख्यातवें भाग कम सहस्र सागरोपम का भाग अन्तःकोडाकोड़ी सागरोपम पत्योपम के असंख्यातवें भाग कम सागरोपम का भाग 38 आहारकशरीरनामकर्म 39.40 तेजसशरीरनामकर्म कार्मणशरीरनामकर्म अन्त:कोडाकोड़ी सागरोपम 20 कोड़ाकोड़ी सागरोपम 2000 वर्ष [प्रज्ञापनासूत्र उत्कृष्ट स्थिति में 2 हजार वर्ष कम
SR No.003483
Book TitleAgam 15 Upang 04 Pragnapana Sutra Stahanakvasi
Original Sutra AuthorShyamacharya
AuthorMadhukarmuni, Gyanmuni, Shreechand Surana, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1983
Total Pages1524
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size37 MB
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