________________ 90 ] [प्रज्ञापनासूत्र सुत्तीमई य चेदी 16, वीइभयं सिंधुसोबोरा 20 // 11 // महुरा य सूरसेणा 21, पाना भंगी य 22, मास पुरिवट्टा 23 / सावत्थी य कुणाला 24, कोडीवरिसं च लाढा य 25 // 116 // सेयविया वि य णयरी केयइप्रद्धच 25 // आरियं भणितं / एत्थुष्पत्ति जिणाणं चक्कीणं राम-कण्हाणं // 117 // से तं खेत्तारिया। [102 प्र. क्षेत्रार्य किस-किस प्रकार के हैं ? [102 उ.] क्षेत्रार्य साढ़ पच्चीस प्रकार के कहे गए हैं / वे इस प्रकार से हैं [गाथाओं का अर्थ-] (1) मगध (देश में) राजगृह (नगर), (2) अंग (देश में) चम्पा (नगरी), तथा (3) बंग (देश में) ताम्रलिप्ती (तामलूक नगरी), (4) कलिंग (देश में) काञ्चनपर और (5) काशी (देश में) वाराणसी (नगरी),॥११२।। (6) कौशल (देश में) साकेत (नगर), (7) कुरु (देश में) गजपुर (हस्तिनापुर), (8) कुशात (कुशावर्त देश में) सौरियपुर (सौरीपुर), (8) पंचाल (देश में) काम्पिल्य, (10) जांगल (देश में) अहिच्छत्रा (नगरी) // 113 / / (11) सौराष्ट्र में द्वारावती (द्वारिका), (12) विदेह (जनपद में) मिथिला (नगरी), (13) वत्स (देश में) कौशाम्बी (नगरी), (14) शाण्डिल्य (देश में) नन्दिपुर, (15) मलय (देश में) भद्दिलपुर // 114 / / / (16) मत्स्य (देश में) वैराट नगर, (17) वरण (देश में) अच्छा (पुरी), तथा (18) दशार्ण (देश में) मृत्तिकावती (नगरी), (16) चेदि (देश में) शुक्तिमती (शौक्तिकावती), (20) सिन्धु-सौवीर देश में वीतभय नगर / / 115 / / (21) शूरसेन (देश में) मथुरा (नगरी), (22) भंग (नामक जनपद में) पावापुरी (अपापा नगरी), (23) पुरिवर्त (परावर्त) (नामक जनपद में) मासा पुरी (माषा नगरी), (24) कुणाल (देश में) श्रावस्ती (सेहटमेहट), (25 // ) लाढ (देश में) कोटिवर्ष (नगर) // 116 / / और (253) केकयार्द्ध (जनपद में) श्वेताम्बिका (नगरी); (ये सब 25 / / देश) आर्य (क्षेत्र) कहे गए हैं। इन (क्षेत्रों) में तीर्थंकरों, चक्रवतियों, राम और कृष्ण (बलदेवों और वासुदेवों) का जन्म (उत्पत्ति) होता है / // 117 / / यह हुआ उक्त क्षेत्रार्यों का वर्णन / 103. से कि तं जातिप्रारिया ? जातिआरिया छम्विहा पण्णत्ता / तं जहा अंबट्ठा 1 य कलिदा 2 विदेहा 3 वेदगा 4 इ य। हरिया 5 चुचणा 6 चेव, छ एया इन्भजातियो' / / 11 / / से तं जातिप्रारिया। [103 प्र.] जात्यार्य किस प्रकार के हैं ? [103 उ.] जात्यार्य छह प्रकार के कहे गए हैं / वे इस प्रकार हैं--- 1. पाठान्तर --अज्जजातितो। 2 जात्यार्य-उमास्वातिकृत तत्वार्थभाष्य में इक्ष्वाकु, विदेह, हरि, अम्बष्ठ, ज्ञात , कुरु, बुबुनाल (?) उग्र, भोग, राजन्य आदि की गणना जात्यार्य में की गई है। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org