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________________ 88] [प्रज्ञापनासूत्र मिलक्ख' प्रणेगविहा पण्णता। तं जहा-सग-जवण-चिलाय-सबर-बब्बर-काय-मुरुडोड्डभडग-णिण्णग-पक्कणिय- कुलक्ख- गोंड-सिंहल- पारस-गांधोडंब- दमिल-चिल्लल- पुलिद-हारोस-डोंबबोक्काण-गंधाहारग-बहलिय-प्रज्जल-रोम-पास-पउसा-मलया य चुंचया य मूलि-कोंकणग-मेयपल्हव-मालव-गग्गर-प्राभासिय-णक्क-चीणा ल्हसिय-खस-खासिय-जेडुर-मंढ-डोंबिलग-लउस-बउसकेक्कया अरवागा हूण-रोसग-मरुग-रुय-विलायविसयवासी य एवमादी / से तं मिलक्खू / [98 प्र.) म्लेच्छ मनुष्य किस-किस प्रकार के हैं ? / [18 उ.] म्लेच्छ मनुष्य अनेक प्रकार के कहे गए हैं। वे इस प्रकार-शक, यवन, किरात, शबर, बर्बर, काय, मरुण्ड, उड्ड, भण्डक, (भडक), निन्नक (निष्णक), पक्कणिक, कुलाक्ष, गोंड, सिंहल, पारस्य, (पारसक) आन्ध्र (क्रौंच), उडम्ब (अम्बडक), तमिल (दमिल-द्रविड़), चिल्लल (चिल्लस या चिल्लक) पुलिन्द, हारोस, डोंब (डोम), पोक्काण (वोक्काण), गन्धाहारक (कन्धारक), बहलिक (बाल्हीक), अज्जल (अज्झल), रोम, पास (मास), प्रदुष (प्रकुष), मलय (मलयाली) और चंचूक (बन्धुक) तथा मूयली (चूलिक), कोंकणक, मेद (मेव), पल्हव, मालव, गग्गर (मग्गर), आभाषिक, णक्क (कणवीर), चीना, ल्हासिक (लासा के), खस, खासिक (खासी जातीय), नेडूर (नेदूर), मंढ (मोंढ), डोम्बिलक, लनोस, बकुश, कैकय, अरबाक (अक्खाग), हूण, रोसक (रूसवासी या रोमक), मरुक, रुत (भ्रमररुत) और विलात (चिलात) देशवासी इत्यादि / यह म्लेच्छों का (वर्णन हुआ।) 66. से कि तं पारिया ? | प्रारिया दुविहा पण्णत्ता / तं जहा-इड्डिपत्तारिया य प्रणिड्विपत्तारिया य / [66 प्र.] प्रार्य कौन-से हैं ? [66 उ.] आर्य दो प्रकार के कहे गए हैं / वे इस प्रकार-ऋद्धिप्राप्त आर्य और ऋद्धिअप्राप्त आर्य। 100. से कि तं इडिपत्तारिया ? इडिपत्तारिया छविहा पण्णत्ता / तं जहा-अरहंता 1 चक्कवट्टी 2 बलदेवा 3 वासुदेवा 4 चारणा 5 विज्जाहरा 6 / से तं इडिपत्तारिया। 1. प्रवचनसारोद्धार की तीन गाथानों में म्लेच्छ के बदले अनार्यों के नाम इस प्रकार गिनाए हैं."सग-जवण. सबर-बब्बर-काय-मुरुडोड्ड-गोण-पक्कणया। अरबाग-होण-रोमय-पारस-खसखासिया चेव // 1583 // दुबिलयलउस-बोक्कस-भिल्लंऽध-पुलिद-कुच-भमररुया कोवाय-चीण-चंचय-मालव-दमिला कुलग्घा य // 1584 // केक्कय-किराय-ह्यमुह-खरमुह-गय-तुरय-मिढयमुहा य / हयकन्ना गयकन्ना अन्ने वि अणारिया बहवे // 1585 // " "शकाः यवना: शबराः बर्बराः कायाः मुरुण्डाः उड्डाः गोड्डाः पक्कणमाः अरबागाः हूणाः रोमकाः पारसाः खसाः खासिकाः दुम्बिलकाः लकुशाः बोक्कशाः भिल्लाः अन्ध्राः पुलिन्द्राः कुञ्चाः भ्रमररुचाः कोर्पका: चीनाः चञ्चकाः मालवाः द्रविडाः कुलार्धाः केकयाः किराताः यमुखाः खरमुखाः गजमुखाः तुरङ्गमुखाः मिण्ढकमुखाः हयकर्णाः गजकर्णाश्चेत्येते देशा अनार्याः / " इति वृत्तिः / पत्रं 445-2 // Jain Education International www.jainelibrary.org For Private & Personal Use Only
SR No.003483
Book TitleAgam 15 Upang 04 Pragnapana Sutra Stahanakvasi
Original Sutra AuthorShyamacharya
AuthorMadhukarmuni, Gyanmuni, Shreechand Surana, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1983
Total Pages1524
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size37 MB
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