________________ 275 281 मारणान्तिक समुद्घात से समवहत जीवादि के क्षेत्र, काल एवं क्रिया की प्ररूपणा तैजस समुद्घात-समवहत जीवादि के क्षेत्र, काल एवं क्रिया की प्ररूपणा आहारक समुद्घात-समवहत जीवादि के क्षेत्र, काल एवं क्रिया की प्ररूपणा केवलिसमुद्घात-समवहत अनगार के निर्जीर्ण अन्तिम पूदगलों की लोकव्यापिता केवलि-समुद्घात का प्रयोजन केवलि-समुदधात के पश्चात योगनिरोध आदि की प्रक्रिया सिद्धों के स्वरूप का निरूपण 294 [77 ] Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org