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________________ २४६ ] सूत्र ७० सूत्र ८३-८४ सूत्र =६-८९ सूत्र ७३,७६,७८ रात्रि में श्राहार रखना या खाना अनेक सूत्रों में निषिद्ध है । विरोधी राज्यों के बीच बारंबार गमनागमन करना । सूत्र ६ सूत्र ६-६२ सूत्र ६३-६८ सूत्र ६९ सूत्र ७१-७२ सूत्र ७७ सूत्र ७९ सूत्र ८० सूत्र ८१-८२ सूत्र ८५ सत्र ९१ Jain Education International - बृहत्कल्प उ. १, सू. ३९ [निशयसूत्र दीक्षा या बड़ी दीक्षा आदि के प्रयोग्य का कथन । साध्वी के स्थान पर साधु को रहने आदि का निषेध | -स्थल के लिये विवेचन देखें । बृहत्कल्पसूत्र उ. ४ सूत्र ९० नमक आदि के संग्रह का निषेध | इस उद्देशक के ७१ सूत्रों के विषय का कथन अन्य आगमों में नहीं है, यथाविकट स्थिति में अर्द्धयोजन के आगे से लाया पात्र लेना । गृहस्थ का शारीरिक परिकर्म करना । स्व-पर को भयभीत करना, विस्मित करना, विपरीत अवस्था में करना For Private & Personal Use Only -- बृहत्कल्पसूत्र उ. ३ - दश. प्र. ६, गा. १८-१९ या कहना । जो जिस धर्मवाला हो उसके सामने उसके धर्म तत्त्वों की प्रशंसा करना अथवा उसकी झूठी प्रशंसा करना । दिवसभोजन की निन्दा व रात्रिभोजन की प्रशंसा करना । नागाढ परिस्थिति में रात्रि में प्रशनादि रखना । संखडी के प्रहारार्थ उपाश्रय का परिवर्तन करना । नैवेद्यपिंड खाना । स्वच्छंदाचारी की प्रशंसा, वंदना करना । अयोग्य से सेवाकार्य कराना । आत्मघात (बालमरणों) की प्रशंसा करना । ॥ ग्यारहवां उद्देशक समाप्त ॥ www.jainelibrary.org
SR No.003462
Book TitleAgam 24 Chhed 01 Nishith Sutra Stahanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Kanhaiyalal Maharaj, Trilokmuni, Devendramuni, Ratanmuni
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1991
Total Pages567
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Ethics, & agam_nishith
File Size11 MB
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