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________________ द्वितीय प्राभृत- प्रथम प्राभृतप्राभृत ] ६. ता पुरत्थिमाओ लोयंताओ पाओ सूरिए आउकायंसि उट्ठेइ, से णं इमं लोयं तिरियं करेड़, करित्ता पच्चत्थिमंसि लोयंतंसि सायं सूरिए आउकायंसि विद्धंसइ एगे एवमाहंसु । [ ३१ एगे पुण एवमाहंसु - ७. ता पुरत्थिमाओ लोयंताओ पाओ सूरिए आउओ उट्ठेइ, से णं इमं लोयं तिरियं करेइ, करित्ता पच्चत्थिमंसि लोयंतंसि सायं सूरिए आउकायंसि पविसइ, पविसित्ता अहे पडियागच्छइ पडियागच्छित्ता पुणरवि अवरभू-पुरत्थिमाओ लोयंताओ पाओ सूरिए आउओ उट्ठेइ एगे एवमाहंसु । एगे पुण एवमाहंसु - ८. ता पुरत्थिमाओ लोयंताओ बहूई जोयणाई बहूइं जोयणसयाइं बहूइं जोयसहस्साइं उड्ढं दूरं उप्पइत्ता एत्थ णं पाओ सूरिए आगासंसि उट्ठेइ, से णं इमं दाहिणंड्ढं लोयं तिरियं करेइ, करित्ता उत्तरड्ढलोयं तमेव राओ, से णं इयं उत्तरоलोयं तिरियं करेइ, करित्ता दाहिणइलोयं तमेव राओ, से णं इमाइं दाहिण-उत्तरड्ढलोयाइं तिरियं करेइ, करित्ता पुरत्थिमाओ लोयंताओ बहूई जोयणाई बहूई जोयणसयाइं, बहूइं जोयणसहस्साइं उड्ढं दूरं उप्पइत्ता, एत्थ णं पाओसूरिए आगासंसि उट्ठेइ, एगे एवमाहंसु । वयं पुण एवं वयामो ता जंबुद्दीवस्स दीवस्स पाईण-पडीणायय-उदीण- दाहिणाययाए जीवाए मंडलं चउव्वीसेणं सरणं छेत्ता दाहिण - पुरत्थिमंसि उत्तर-पच्चत्थिमंसि य चउब्भाग - मंडलंसि इमीसे रयणप्पभाए पुढवीए बहुसमरमणिज्जाओ भूमिभागाओ अट्ठजोयणसयाई उड्ढं उप्पइत्ता- एत्थ णं पाओ दुवे सूरिया आगासाओ उत्तिट्ठसि, - ते णं इमाई दाहिणुत्तराई जंबुद्दीव-भागाई तिरियं करेंति, करेंतित्ता पुरत्थिम-पच्चत्थिमाई जंबुद्दीवभागाई तामेव राओ, ते णं इमाइं पुरत्थिम-पच्चत्थिमाई जंबुद्दीवभागाई तिरियं करेंति, करेंतित्ता दाहिणुत्तराई जंबुद्दीवभागाई तामेव राओ, इमाई दाहिणुत्तराइं पुरत्थिम-पच्चत्थिमाइं जंबुद्दीवभागाइं तिरियं करेंति, करेंतित्ता जंबुद्दीवस्स दीवस्स पाईण-पडीणायय-उदीण दाहिणाययाए जीवाए मंडलं चउव्वीसे णं सएणं छेत्ता दाहिण पुरत्थिमंसि उत्तर-पच्चत्थिमंसि य चउब्भाग-मंडलंसि इमीसे रयणप्पभाए पुढवीए बहुसमरमणिज्जाओ भूमिभागाओ अट्ठ जोयणसयाई उड्ढं उप्पइत्ता- एत्थ णं पाओ दुवे सरिया आगासंसि उत्तिट्ठसि ।
SR No.003459
Book TitleSuryaprajnapti Chandraprajnapti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Kanhaiyalal Maharaj, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1989
Total Pages302
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Geography, agam_suryapragnapti, & agam_chandrapragnapti
File Size4 MB
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