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________________ परिशिष्ट ] संचरण करता है, जिससे एक दिवस में २ योजन ४८ /६१ भाग संचरण करता I १८३ मंडल का १८३ दिवस में सूर्य संचरण करता है। एक दिवस में एक मंडल में संचार करता है । सूर्य के सर्वमंडलों का संचरण क्षेत्र ५१० योजन का है। एक मंडल का एक दिवस का संचरण २ योजन ४८/ ६१ भाग होता है । - सूत्र १८ ॥ प्रथम प्राभृत का छठा प्राभृत-प्राभृत समाप्त ॥ सूत्र २० प्रत्येक मंडल का विष्कम्भ-आयाम जब सूर्य सर्वाभ्यंतरमंडल में हो तब १ लाख योजन का ४८ / ६१ भाग बाहल्य से ९९६४० योजन आयाम विषकम्भ से ३१५०८९ योजना परिक्षेप से संक्रमण करता है तब १८ मुहूर्त का उत्कृष्ट दिवस और जघन्य १२ मुहूर्त की रात्रि होती है । जब सूर्य सर्वाभ्यन्तरमंडल के अनन्तरवर्ती मंडल में संक्रमण करता है तब एक योजन का ४८ / ६१ भाग बाहल्य ९९६४५ योजन ३५/६१ भाग आयाम विष्कम्भ से, ३१५१०७ योजन किंचित विशेष न्यून परिक्षेप से चार (गति) करता है। तब दिवस और रात्रि का प्रमाण सर्वाभ्यन्तरमंडल के समान ही होता है । सर्वाभ्यन्तरमंडल में आयाम-विष्कम्भ का प्रमाण [ २११ एक सूर्य १८० योजन अवगाहन करके गति करता है । जम्बू द्वीप के दोनों सूर्य की अपेक्षा ३६० योजन अवगाहना जम्बूद्वीप क्षेत्र के १ लाख योजन प्रमाण में से कम करने पर ९९६४० योजन रहते हैं । जो सर्वाभ्यन्तरमंडल का आयाम - विष्कम्भ है । सूत्र २० सर्वाभ्यन्तरमंडल का परिक्षेप सर्वाभ्यन्तरमंडल का परिक्षेप (३१५०८९) योजन है। वह इस प्रकार है (सर्वाभ्यन्तरमंडल का विष्कम्भ ) २x१० इस सूत्र से परिक्षेप का विचार करने पर निम्नप्रकार से होगा । ) (९९६४०) २x१० )९९२८१२९६००×१० ) ९९२८१२९६००० ९९२८१२९६०००
SR No.003459
Book TitleSuryaprajnapti Chandraprajnapti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Kanhaiyalal Maharaj, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1989
Total Pages302
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Geography, agam_suryapragnapti, & agam_chandrapragnapti
File Size4 MB
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