SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 25
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ आनन्दानुभूति श्रुतसेवा के इस महा यज्ञ में श्री विनय मुनि जी आदि के सविनय सविवेक विविध सहयोगों से अधिक आनन्दानुभव कर रहा हूँ और सभी सहयोगियों की संयम साधना सफल हो यह कामना कर रहा हूँ । आत्मशोधन - सूर्यप्रज्ञप्ति के संपादन में जहाँ कहीं प्रमादवश कुछ भी विपरीत या असंगत हुआ हो तो आगमज्ञ बहुश्रुत सुधार कर स्वाध्याय करें और आगामी प्रकाशन के लिये उपयोगी सुझाव प्रेषित करें । सहकार साभार स्वीकार सूर्यप्रज्ञप्ति के कतिपय सूत्रों से संबंधित गणित विभाग का संक्ष्सिप्त विवेचन खम्भात सम्प्रदाय के आचार्य प्रवर श्री कान्तिॠषि जी म. सा. के प्रशिष्य स्व. श्री महेन्द्रऋषि जी न्याय साहित्य - व्याकरणाचार्य ने लिख कर हार्दिक सहयोग किया है। पंडित साहब श्री शोभाचन्द्र जी भारिल्ल ने समय समय पर अनेक उपयोगी सुझाव दे कर प्रस्तुत संस्करण के सम्पादन में सक्रिय सहयोग किया है। श्री रुद्रदेव जी त्रिपाठी ने सूर्यप्रज्ञप्ति की प्रस्तावना लिख कर जिज्ञासु ज्योतिर्विदों को सूर्यप्रज्ञप्ति के स्वाध्याय के लिये प्रेरित किया है। आगम समिति के सूत्रधार सज्जन ज्ञावकों ने मेरे श्रम की सफलता के लिये जिज्ञासु जनों में इस संस्करण को वितरित किया है। ३१ जनवरी' ८९ [ २२ ] - अ. प्र. मुनि कन्हैयालाल 'कमल' श्री वर्धमान महावीर केन्द्र, आबू पर्वत - ३०७५०१
SR No.003459
Book TitleSuryaprajnapti Chandraprajnapti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Kanhaiyalal Maharaj, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1989
Total Pages302
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Geography, agam_suryapragnapti, & agam_chandrapragnapti
File Size4 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy