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पन्द्रहवाँ प्राभृत
चंद-सूर-गह-णक्खत्त-ताराणं गइपरूवणं
प. ता कहं ते सिग्धगई? आहिए त्ति वएजा। उ. ता एएसि णं चंदिम -सूरिय-गहगण-णक्खत्त-तारारूवाणं
चंदेहितो सूरे सिग्घगईं, सूरेहितो गहा सिग्घगई, गहेहितो णक्खत्ता सिग्घगई, णक्खत्तेहितो तारा सिग्घगई,
सव्वप्पगई चंदा सव्वसिग्घगई तारा। १. प. ता एगमेगेणं मुहुत्तेणं चंदे केवइयाइं भागसयाइं गच्छइ?
उ. ता जं जं मंडलं उवसंकमित्ता चारं चरइ तस्स तस्स मंडलपरिक्खेवस्स सत्तरस अडसट्टि भागसए
गच्छइ,मंडल सयसहस्से णं अट्टाणउइ सएहिं छत्ता छेत्ता। २. प. ता एगमेगेणं मुहुत्तेणं सूरिए केवइयाइं भागसयाई गच्छइ?
उ. ताजं जं मंडलं उवसंकमित्ता चारं चरइ,तस्स तस्स मंडल-परिक्खेवस्स अट्टारस तीसे - भागसए गच्छइ,मंडलं सयसहस्से णं अट्टाणउइसएहिं छेत्ता छेत्ता।
ता एएसि णं चंदिम-सूरिय-गह-णक्खत्त-तारारूवाणं कयरे कयरेहिंतो सिग्घगई वा मंदगई वा? उ. ता चंदेहिंतो सूरा सिग्घगई,
सूरेहिंतोगहा सिग्घगई, गहे हिंतो णक्खत्ता सिग्घई,
सव्वप्पगई चंदा, सव्वसिग्घगई तारा। २. ग्रहों की गति का निरूपण मूल पाठ में नहीं है।
ग्रहों की गति के संबंध में टीकाकार का स्पष्टीकरण - ग्रहास्तु वक्रानुवक्रादिगतिभावतोऽनियतगतिप्रस्थानास्ततो न तेषामुक्तप्रकारेण गतिप्रमाणप्ररूपणा कृता, उक्तं च गाहाओचंदेहिं सिग्घयरा, सूरा सूरेहिं होंति णक्खत्ता। अणिययगइपत्थाणा, हवंसि सेसा गहा सव्वे ॥१॥ अट्ठारस पणतीसे, भागसए गच्छइ मुहुत्तेणं। नक्खत्तं चंदो पुण, सत्तरससए उ अडसढे ॥२॥ अट्ठारस भागसए, तीसे गच्छइ रती मुहुत्तेण। नक्खत्तसीमछेदो, सो चेव इहं पि णायव्वो॥३॥