SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 112
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ एकविंशतिस्थानक समवाय शबल दोष, कर्मप्रकृति, पंचम षष्ठ आरक का कालप्रमाण, स्थिति, श्वासोच्छ्वास, आहार, सिद्धि । द्वाविंशतिस्थानक समवाय परीषह, दृष्टिवाद, पुद्गल परिणाम, स्थिति, व्सासोच्छ्वास, आहार, सिद्धि । त्रयोविंशतिस्थानक समवाय सूत्रकृतांग के अध्ययन, तेईस तीर्थंकरों को सूर्योदयकाल में केवलज्ञान, पूर्वभव में एकादशांगी, स्थिति, श्वासोच्छ्वास, आहार, सिद्धि । चतुर्विंशतिस्थानक समवाय देवाधिदेव (तीर्थंकर), चुल्लहिमवंत - शिखरिजीवा, स-इन्द्र देवस्थान, उत्तरायणसूर्य, गंगा-सिन्धु महानदी, रक्ता - रक्तोदा महानदी, स्थिति, श्वासोच्छ्वास, आहार, सिद्धि । पंचविंशतिस्थानक समवाय पंच यामों की भावनाएँ, मल्लिनाथ की अवगाहना, दीर्घवैताढ्य पर्वत, दूसरी पृथ्वी के नारकावास, आचारांग के अध्ययन, मिथ्यादृष्टि-विकलेन्द्रिय का कर्मप्रकृतिबंध, गंगा-सिन्धु, रक्तारक्तवती महानदी, लोकविन्दुसार के वस्तु, स्थिति, श्वासोच्छ्वास, आहार, सिद्धि । षड्विंशतिस्थानक समवाय दशा-कल्प-व्यवहार के उद्देशनकाल, कर्मप्रकृतिसत्ता, स्थिति, श्वासोच्छ्वास, आहार, सिद्धि । सप्तविंशतिस्थानक समवाय अनगार-गुण, नक्षत्रों से व्यवहार, नक्षत्रमास, सौधर्म - ईशान कल्प की पृथ्वी का बाहल्य, कर्म- प्रकृति, सूर्य का चार, स्थिति, श्वासोच्छ्वास, आहार, सिद्धि । अष्टाविंशतिस्थानक समवाय आचारप्रकल्प, मोहकर्म की सत्ता, आभिनिबोधिक ज्ञान, ईशान कल्प में विमानों की संख्या, कर्मप्रकृतिबन्ध, स्थिति, श्वासोच्छ्वास, आहार, सिद्धि । एकोनत्रिंशत्स्थानक समवाय पापश्रुतप्रसंग, आषाढ़ आदि मासों में रात्रि - दिवस की संख्या, देवों में उत्पत्ति, स्थिति, श्वासोच्छ्वास, आहार, सिद्धि । त्रिंशत्स्थानक समवाय अवगाहना, मोहनीय- स्थान, मंडितपुत्र की श्रमणपर्याय, तीस मुहूर्तों के तीस नाम, अर तीर्थंकर की सहस्रारेन्द्र के सामानिक देव, पार्श्वनाथ का गृहवास, महावीर का गृहवास, रत्नप्रभा पृथ्वी के नारकावास, स्थिति, श्वासोच्छ्वास, आहार, सिद्धि । एकत्रिंशत्स्थानक समवाय सिद्धों के आदिगुण, मंदरपर्वत, सूर्य का संचार, स्थिति, श्वासोच्छ्वास, आहार, सिद्धि । [ १०९] ६२ ६५ ६७ ६८ ७० ७५ ७७ ७९ ८३ ८५ ९२
SR No.003441
Book TitleAgam 04 Ang 04 Samvayanga Sutra Stahanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Hiralal Shastri
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1991
Total Pages379
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Metaphysics, & agam_samvayang
File Size24 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy