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________________ विधिमार्गप्रपागतविषयानुक्रमणिका w w १० ५८-६२ ६२-६४ संपादकीय प्रस्तावना पृ. अ-ऐ - सूयगडंगविही श्रीजिनप्रभसूरिका संक्षिप्त जीवनचरित्र १-२१ - ठाणंगविही जिनप्रभसूरिकी परम्पराके प्रशंसात्मक - समवायंगविही कुछ गीत और पद २२-२४ - निसीहाइच्छेयसुत्तविही १ सम्मत्तारोवणविही १-३ - भगवईजोगविही २ परिग्गहपरिमाणविही ४-६ - नायाधम्मकहांगविही ३ सामाइयारोवणविही - उवासगदसंगविही ४ सामाइयग्गहण-पारणविही -- अंतगडदसंगविही ५ उवहाणनिक्खिवणविही - अणुत्तरोववाइयदसंगविही - पंचमंगलउवहाण - पण्हावागरणंगविही ६ उवहाणसामायारी -विवागसुयंगविही ७ उवहाणविही १२-१४ - ओवाइयाइ-उवंगविही ८ मालारोवणविही १५-१६ - पइण्णगविही ९ उवहाणपइट्ठापंचासगपगरण १६-१९ - महानिसीहजोगविही १० पोसहविही १९-२२ - जोगविहाणपयरणं ११ देवसियपडिक्कमणविही २५ कप्पतिप्पसामायारी १२ पक्खियपडिक्कमणविही २३ | २६ वायणाविही १३ राइयपडिक्कमणविही २४ २७ वायणारियपयट्ठावणाविही १४ तवोविही २५-२९ | २८ उवज्झायपयट्ठावणाविही १५ नंदिरयणाविही २९-३३/२९ आयरियपयट्टावणाविही १६ पवजाविही ३४-३५ - पवत्तिणीपयट्ठावणाविही १७ लोयकरणविही ३० महत्तरापयट्ठावणाविही १८ उवओगविही ३१ गणाणुण्णाविही १९ आइमअडणविही ३२ अणसणविही २० उवट्ठावणाविही ३८-४० ३३ महापारिट्ठावणियाविहीं २१ अणज्झायविही ४०-४२ ३४ आ लो य ण वि ही २२ सज्झायपट्टवणविही ४२-४४ ~ णाणाइयारपच्छित्तं २३ जोगनिक्खेवणविही ४४-४६ - दसणाइयारपच्छित्तं २४ जो ग विही ४६-६२ -- मूलगुण गायच्छित्तं - दसवेयालियजोगविही -पिंडालोयणाविहाणपगरणं - उत्तरज्झयणजोगविही - उत्तरगुणाइयारपच्छित्तं - आयारंगविही - विरियाइयारपच्छित्तं ६४ ६६ ६६-७१ ७१-७४ ७७-७१ ७९-९७ ८२-८६ ५० Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003393
Book TitleVidhi Marg Prapa
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVinaysagar
PublisherPrakrit Bharti Academy
Publication Year2000
Total Pages186
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Ritual, & Vidhi
File Size12 MB
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