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________________ ६ दशाश्रुतस्कन्धसूत्रम् प्रतिमा वाले साधु को यदि कंटकादि लग जावे, उसको न निकलाने का वर्णन २५६ २६० प्रतिमा वाले साधु की आँखों में यदि रज आदि पड़ जावे तो उसको न निकालने का वर्णन प्रतिमा वाले साधु को विहार करते हुए जहाँ पर सूर्य अस्त हो जाए उसे वहीं ठहर जाना चाहिए तथा प्रातःकाल में जिस ओर मुख हो उस ओर ही विहार करना चाहिए, इस विषय का वर्णन सचित्त पृथिवी पर निद्रादि न लेनी २६१ चाहिए तथा पुरीषादि का निरोध न करना चाहिए सचित रज से यदि शरीर छू जाय तो उस समय गृहस्थों के घरों में आहार को न जाना चाहिए प्रतिमा वाले साधु को हाथ मुँह आदि न धोने चाहिएँ, किन्तु मलमूत्रादि की शुद्धि जल से अवश्य करनी चाहिए Jain Education International २६४ २६६ २६८ • प्रतिमा वाले साधु के सामने यदि अश्वादि जीव आते हों, तो उसे पीछे न हटना चाहिए, यदि भद्र आते हों तो उसे पीछे हट जाना चाहिए प्रतिमा वाला साधु धूप से उठकर छाया में न जाए और छाया से उठ कर धूप में न जाए मासिक प्रतिमा सूत्रानुसार पालन करे दूसरी प्रतिमा से ७ वीं प्रतिमा पर्यन्त वर्णन २६६ २७१ २७३ प्रथम सप्तरात्रि की प्रतिमा का सविस्तर वर्णन द्वितीय सप्तरात्र की प्रतिमा और २७७ तृतीय सप्तरात्रकी प्रतिमाओं का सविस्तर वर्णन अहोरात्रकी प्रतिमा का सविस्तर वर्णन २८० एकरात्रिकी भिक्षु - प्रतिमा का सविस्तार वर्णन अष्टमी दशा श्रमण भगवान् महावीर स्वामी के पाँच कल्याणकों का वर्णन एक रात्रिकी भिक्षु प्रतिमा के सम्यक्तया न पालने का फल एक रात्रिकी भिक्षु - प्रतिमा के सम्यक्तया पालने का फल २८५ उक्त १२ प्रतिमाएँ स्थाविरों द्वारा प्रतिपादित की गई हैं २८७ नवमी दशा चंपा नगरी में भगवान् का विराजमान होना २७४ पहले महामोहनीय कर्म का वर्णन दूसरे तीसरे चौथे For Private & Personal Use Only २८१ www २८४ भगवान् का साधु और साध्वियों को आमंत्रित कर ३० महामोहनीय कर्मों का वर्णन करना २८६ २६५ २६८ २६६ ३०० ३०१ www.jainelibrary.org
SR No.002908
Book TitleAgam 27 Chhed 04 Dashashrut Skandh Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAtmaram Maharaj
PublisherPadma Prakashan
Publication Year2001
Total Pages576
LanguageHindi, English
ClassificationBook_Devnagari, Book_English, Agam, Canon, Conduct, & agam_dashashrutaskandh
File Size11 MB
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