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विसुरसरिसरसलिलदिवशकविमारलरचलिउडमान होऽयसमलहसुपरिमल सम्मास जामसंजणियदिदि पयर्टनसमाहियसरकनिदिनिवर्षगतिमिहिमिदियध दुहणिादा वश्सवणुघणाघला हंसिववरपामरम्सदम्म उरविललिवहारावलि सार्वतिसमयसयण
मरुदेवायोउसम्व बानलाकन।
कोई सुरसरिता के जल से स्नान कराती है। कोई माला, उजला वस्त्र और सुगन्धित लेप देती है। भाग्यविधाता, सुखनिधि और अभीप्सित जिनेन्द्रदेव को प्रकट होने (गर्भ में आने में) जब छह माह रह गये तो राजा के आँगन में निधियों में धन रखनेवाले कुबेररूपी मेघ ने रनों की बरसा की।
घत्ता-सरोवर के कमल पर हंसिनी के समान, सुन्दर और सुखद, तथा ठीक है अग्रभाग जिसका, ऐसे शयनतल पर वह मरुदेवी सोती है। जिसके उरतल पर हारावली झूल रही है ऐसी वह स्वयं स्वप्नावली देखती है॥४॥
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