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________________ हिंपरियरिसमरविव्सकिरणकलावहिंझस्दिनाशाय नाक्यकखाललयंकावकावाउमा पालमप्रकलाकारणाअक्ककित्तिजयसापडरियकचाणकानुनकायज्ञसाभारसश्सवार यावनवज्ञसडमुहमुक्कड़करबकलामियरवारससिदासकइसक्वतासाणधारायारझरुपए पतवणुगुपटकारमकपिसककृश्यगदायलकाहरवारिरालयधराणियलकृसबसविस तमायगर संदणसेकपडियसुरंग असिणिहसणसितिमिहपिंगलियर रूंडवडसावियरुशखा श्रीकार्तिक घिरा हुआ वह ऐसा मालूम होता है, जैसे सूर्य अपने किरणकलाप से विस्फुरित हो। घत्ता-उठी हुई तलवारों से भयंकर, क्रोध से लाल अर्ककीर्ति और जयकुमार की सेनाएँ कन्या के कारण बुद्ध में आ भिड़ीं॥२५॥ आकारवाले, झनझनाते धनुषों की डोरी की टंकारोंवाले, मुक्त तीरों से आकाश को आच्छादित करनेवाले, रक्त की धारा से धरती पर रेल-पेल मचा देनेवाले, अंकुशों के वश शान्त महागजोंबाले, रथों के समूह में धराशायी अश्वोंवाले, तलवारों के संघर्षण से उत्पन्न अग्नि की ज्वालाओं से जो पीले हैं; जहाँ कटे हुए सिर, उर और कर भूमितल पर व्याप्त हैं, भयंकर काल वैताल मिल रहे हैं, मारो-मारो का भयंकर कोलाहल हो रहा है, भैरुण्ड पक्षियों के झुण्डों के खण्ड अच्छे लग रहे हैं, स्वर्ण के कंचुक और कवच पहने हुए, अमर्ष से भरी हुई, अपने अंगों को ढके हुए, अपने मुखों से हकारने को ललकार छोड़ते हुए, चक्र घुमातेहुए, इन्द्र को डरातेहुए. झस कोंत और वज्र से भयंकर Jain Education Intematon For Private & Personal use only www.jainelibrary.org
SR No.002738
Book TitleAdi Purana
Original Sutra AuthorPushpadant
Author
PublisherJain Vidyasansthan Rajasthan
Publication Year2004
Total Pages712
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Literature
File Size147 MB
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