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________________ हियदि प्रकरणमवाधिवमत्राननणायाशंदईदाणवमहणु कासवर्षणु चक्क वश्मर सरथचक्रवर्तित पुलासदेवकश्चरे रदहोकरी सरथेनिनामांकित जगमगा वायुसज्या रासेवन गविसर्जनप्रसव पियारी परि हरगारीता जियहिण तोअसिवा णिजयास रिमाणिध उपियदिइयोणपबाइल कजविवञ्जा गाठताहिं अमरिंदसमाण मुहारहराणी थियन-दि प्रसासदेसरधव ऊत्सेटदेश्करिमि ल्पकिरमानीवस जो मानो मात्रावृत्तवाले मात्राओं से युक्त नागर अक्षर हों। "मैं दानवों का मर्दन करनेवाला ऋषभ का पुत्र रूप पिओगे।" उसने उसे इस प्रकार बाँचा और अपना काम समझ लिया। वह वहाँ गया जहाँ देवेन्द्र के समान चक्रवर्ती हूँ। यदि तुम मुझ भरत को विश्व में भय उत्पन्न करनेवाली प्रियकारी और पराभव करनेवाली सेवा पृथ्वी का राणा स्थित था। करते हो तो जीवित रह सकते हो, नहीं तो तुम विजयश्री को माननेवाले मेरी तलवार के पानी को निश्चित Jain Education International For Private & Personal use only www.jainelibrary.org
SR No.002738
Book TitleAdi Purana
Original Sutra AuthorPushpadant
Author
PublisherJain Vidyasansthan Rajasthan
Publication Year2004
Total Pages712
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Literature
File Size147 MB
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