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मागधदेव कर यस्वण समु की वेदका क्रम
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लिजिय का ले जाएग इजल प प्फुल्लिउसल दलुट संगती सलिलि उडी हरे दि प्रमदा
डसिया हरण
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सुरसमरसहा सप्तमं करणा डणिरिखविव एक खटा करेण
जो ऐसा लग रहा था मानो अपनी कान्ति से काजल को पराजित करनेवाले यमुना नदी के जल में शतदल कमल खिला हुआ हो । १६ ।।
सरथचन कउनापि वाणुमागजद वगृदे श्रममन
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भौहों के भंग से भयंकर भृकुटी धारण करनेवाला, विस्फुरित दाँतों से ओठों को चबाता हुआ, हजारों देवयुद्धों में भयंकर दुर्दर्शनीय शत्रुओं को क्षय करनेवाला
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